मलेरिया बुखार (Malaria in Hindi) – कारण, लक्षण, व घरेलू उपाय

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मलेरिया (Malaria) एक बहुत ही खतरनाक वाहक जनित बीमारी है जो प्लाज़्मोडियम (Plasmodium) नामक परजीवी के कारण होता है। यह एक संक्रामक रोग है। मलेरिया बुखार में रोगी को तेज ठंड एवं सर्दी रहती है और बार-बार बुखार आता रहता है।

भारत में कई सालों से मलेरिया बुखार का प्रकोप चलता आ रहा है। यह एक बहुत ही जानलेवा रोग है जिसका वर्णन आयुर्वेद और प्राचीन भारतीय चिकित्सा साहित्य में भी किया गया है।

यह रोग अधिकतर उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों (Tropical regions) एवं उपोष्णकतिबंधीय क्षेत्रों (Subtropical regions) में अधिक फैलता है। इन क्षेत्रों में भारत भी शामिल है और अफ्रीका एवं एशिया के कई देश आते हैं।

प्रत्येक वर्ष विश्व के लगभग 55 करोड़ लोग मलेरिया (malaria kya hota hai)की चपेट में आते हैं जिसमें से इस रोग से हर साल लगभग 15-20 लाख लोगों की मृत्यु हो जाती है। मलेरिया से मरने वालों में सबसे अधिक अफ्रीकी बच्चे हैं। प्रतिवर्ष 25 अप्रेल को विश्व मलेरिया दिवस (World Malaria Day) मनाया जाता है।

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मलेरिया क्या होता है ? (What is Malaria in Hindi) 

मलेरिया malaria in hindi
Malaria

मलेरिया (Malaria) एक प्रकार का बुखार है। यह बुखार प्लाजमोडियम (Plasmodium) नामक परजीवी (Parasite) के कारण होता है। जिसका वाहक मादा एनोफिलिस मच्छर (Female Anopheles mosquito) होता है।

यह एक प्रकार का संक्रामक रोग है जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। इस रोग को दुर्वात भी कहा जाता है।

मलेरिया के प्रकार (Types of Malaria in Hindi)

मलेरिया कितने प्रकार का होता है? 

मलेरिया 5 प्रकार का होता है जो निम्नलिखित है –

प्लास्मोडियम फैल्सीपैरम (Plasmodium falciparum in Hindi)

इस परजीवी के कारण होने वाला मलेरिया बहुत ही खतरनाक व जानलेवा होता है। दुनियां में मलेरिया (malaria ke prakar) से होने वाली मौतें अधिकतर इसी परजीवी के कारण होती है। इससे ग्रसित व्यक्ति को बहुत अधिक ठण्ड लगती है और असहनीय सिरदर्द होता है।

रोगी को उल्टियाँ भी होती है। यह परजीवी मुख्य रूप से अफ्रीका में पाया जाता है। इस परजीवी की खोज Welch ने की थी।

प्लाज्मोडियम विवैक्स (Plasmodium vivax in Hindi)

लोगों में होने वाला मलेरिया बुखार सबसे अधिक इसी परजीवी (प्लाज्मोडियम विवैक्स) के कारण होता है। यह परजीवी प्रमुख रूप से एशिया तथा दक्षिण अमेरिका में पाया जाता है।

यह परजीवी सौम्य तृतीयक मलेरिया (Benign tertian malaria) पैदा करता है जो प्रत्येक 48 घंटों अर्थात प्रत्येक तीसरे दिन में अपना प्रभाव दिखता है। यह मच्छर अधिकतर दिन के समय में काटता है। इसके लक्षण प्लास्मोडियम फैल्सीपैरम की तुलना में थोड़े हल्के होते हैं।

हाथ-पेरों में दर्द, कमर दर्द, सिरदर्द, ठण्ड के साथ बुखार आना, भूख न लगना आदि इसके लक्षण हैं। यह परजीवी तीन वर्षों तक यकृत (Liver) में रह सकता है जिसके कारण भविष्य में फिर से मलेरिया हो सकता है।

प्लास्मोडियम ओवेल (Plasmodium ovale in Hindi)

malaria mosquito in hindi
Malaria

यह परजीवी (malaria ke prakar) मुख्य रूप से पश्चिम अफ्रीका में पाया जाता है। यह परजीवी बहुत ही असामान्य प्रकार का होता है जो मलेरिया के लक्षणों को बिना प्रदर्शित किये कई वर्षों तक यकृत (लीवर) में रह सकता है। यह परजीवी भी सौम्य तृतीयक मलेरिया (Benign tertian malaria) पैदा करता है।

प्लास्मोडियम मलेरी (Plasmodium malariae in Hindi) 

यह परजीवी बहुत ही विरल (Rare) होता है और मुख्य रूप से केवल अफ्रीका में पाया जाता है। यह मलेरिया प्लास्मोडियम फैल्सीपैरम और प्लाज्मोडियम विवैक्स से कम खतरनाक होता है।

यह परजीवी क्वार्टन मलेरिया (Quartan malaria) पैदा करता है जो प्रत्येक 72 घंटों में केवल एक बार अर्थात प्रत्येक चौथे दिन बुखार आता है।

इस प्रकार के मलेरिया में रोगी के मूत्र अर्थात यूरिन के साथ प्रोटीन (Protein) निकलता जिसके कारण शरीर में प्रोटीन की कमी आ जाती है और प्रोटीन की कमी के कारण शरीर में सूजन आने लगती है।

प्लास्मोडियम नोलेसी (Plasmodium knowlesi in Hindi) 

यह भी एक प्रकार का विरल परजीवी है जो मुख्य रूप से दक्षिण-पूर्व एशिया में पाया जाता है। यह एक प्रकार का प्राइमेट परजीवी है जो मलेशिया में मानव मलेरिया का सबसे सामान्य कारण है। इस परजीवी के कारण होने वाले मलेरिया के लक्षण – हाथ-पेरों में दर्द, सिरदर्द, ठण्ड लगकर ज्वर आना, भूख न लगना आदि है। 

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मलेरिया बुखार के लक्षण (Symptoms of Malaria in Hindi) 

Female anopheles mosquito
Photo by Egor Kamelev from Pexels
 malaria ke lakshan in hindi  malaria ke symptoms 

मलेरिया के लक्षण प्रत्येक व्यक्ति में भिन्न-भिन्न होते हैं। परंतु कुछ लक्षण ऐसे होते हैं जो सभी में समान दिखाई देते हैं। मलेरिया के लक्षण (malaria ke lakshan in hindi) निम्नलिखित हैं –

  • अचानक ठंड लगना (Cold)
  • गर्मी लगकर बुखार आना (Fever) और पसीने के साथ बुखार उतरना
  • थकान आना (Tiredness)
  • खून की कमी होना (Anemia) (खून के विनाश के कारण)
  • मांसपेशियों में दर्द होना (Muscles pain) malaria ke symptoms
  • उल्टी (Vomiting) और दस्त लगना (Diarrhea)
  • सिरदर्द होना (Headache)
  • गले में खराश (Sore throat) होना
  • जोड़ों में दर्द होना (Joint pain)

मलेरिया के कुछ लक्षण (malaria bukhar ke lakshan) बहुत जानलेवा होते हैं। गंभीर स्तिथियों में रोगी बेहोश हो जाता है और उसकी मृत्यु भी हो सकती है।

मलेरिया के कारण (Causes of Malaria in Hindi)

मलेरिया एक ऐसा रोग है जो प्लाज़्मोडियम (Plasmodium) नामक प्रोटोजोआ परजीवी के कारण होता है। जिसका वाहक मादा एनोफिलिस मच्छर होता है। मलेरिया (malaria ke karan) संक्रमण व्यक्ति से मच्छर तथा मच्छर से व्यक्ति में फैलता है।

इस प्रकार जब कोई संक्रमित मच्छर स्वस्थ व्यक्ति के शरीर पर डंक मारता है तो उसके डंक में उपस्थित मलेरिया के जीवाणु उस व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और जब उसी व्यक्ति को कोई दूसरा मच्छर काटता है तो वो जीवाणु मच्छर में चले जाते हैं। और इस प्रकार वह मच्छर दूसरे व्यक्तियों को संक्रमित करता है।

मादा एनोफिलिस मच्छर के काटने पर मलेरिया (malaria hone ke karan) के परजीवी व्यक्ति के रक्त में उपस्थित लाल रक्त कोशिकाओं में प्रवेश कर वहां गुणा करते हैं जिसके कारण शरीर में रक्त की कमी (Anemia) आ जाती है।

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मलेरिया की पहचान (Diagnosis of Malaria in Hindi) 

मलेरिया का निदान करने के लिए निम्नलिखित तरीके अपनाए जा सकते हैं –

सूक्ष्मदर्शी यंत्र द्वारा (By Microscope)

कोई भी बुखार मलेरिया (malaria ki janch) है या नहीं इसका पता लगाने के लिए प्रयोगशाला या लैब में रक्त की जांच की जाती है। इसके लिए रोगी के शरीर से रक्त निकालकर कांच की पट्टिका पर स्लाइड तैयार की जाती है। इस स्लाइड को सूक्ष्मदर्शी यंत्र की सहायता से मलेरिया के परजीवी की पहचान की जाती है।

मलेरिया रैपिड एंटीजन टेस्ट (Malaria Rapid Antigen Test)

मलेरिया के निदान के लिए मलेरिया रैपिड एंटीजन टेस्ट (Malaria Rapid Antigen Test) भी उपलब्ध है। इसके लिए प्रयोगशाला की आवश्यकता नहीं पड़ती है। रक्त की एक बूंद से इसका परिक्षण किया जाता है और आधे घंटे के अंदर रिपोर्ट तैयार हो जाती है।

डिपस्टिक परीक्षण (Dipstick test)

इस टेस्ट के आधार पर भी मलेरिया का निदान (malaria ki janch)किया जा सकता है। इसका परिक्षण भी मलेरिया रैपिड एंटीजन टेस्ट की भांति किया जा सकता है। ये टेस्ट सूक्ष्मदर्शी से अल्पतर (Lesser) होते हैं तथा उन क्षेत्रों में प्रयोग में लाए जाते हैं जहां सूक्ष्मदर्शी की सुविधा नहीं होती है।

पॉलीमरेज श्रृंखला अभिक्रिया (Polymerase chain reaction, PCR)

PCR अभिक्रिया का प्रयोग करके भी मलेरिया का परीक्षण किया जा सकता है किंतु यह अन्य परीक्षणों की तुलना में काफी महंगा होता है साथ ही ये कुछ विशेष प्रयोगशालाओं में ही उपलब्ध होते हैं। इसलिए इसका प्रयोग कम होता है।

मलेरिया से बचाव (Prevention of Malaria in Hindi) 

मलेरिया से बचने (malaria se bachav) के लिए मच्छरों से बचना चाहिए क्योंकि मच्छर ही मलेरिया परजीवी के वाहक होते हैं। मादा एनोफिलिस मच्छर के काटने पर हमारे शरीर में प्लास्मोडियम परजीवी प्रवेश कर जाते हैं। इसलिए मच्छरों से बचाव करके मलेरिया की रोकथाम (malaria se bachav) की जा सकती है।

मलेरिया से बचने के लिए निम्नलिखित सावधानियां बरतनी चाहिए –

मच्छरों को पनपने से रोकना

मलेरिया से बचने का सबसे अच्छा तरीका है मच्छरों को पनपने से रोकना। इसके लिए अपने घरों के आसपास की नालियों को समय पर अच्छी तरह साफ करना चाहिए और गड्डों में ठहरे पानी का उचित प्रबंधन करना चाहिए जिससे पानी इकट्ठा नहीं हो और मच्छर न पनपे।

तालाबों एवं कुओं में गम्बूसिया मछलियों को पालें। ये मछलियां मच्छरों के लार्वा को खा जाती है। जिससे मच्छर पैदा नहीं होते हैं।

मच्छरों को नष्ट करना

अपने घर पे या घर के बाहर यदि मच्छर है तो उनको कीटनाशक दवाओं (insecticides) का छिडकाव करके नष्ट करना चाहिए। मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में भी कीटनाशकों का छिडकाव किया जाना चाहिए।

विश्व स्वास्थ संगठन (WHO) ने मच्छरों पर छिड़काव करने के लिए 12 दवाओं को मान्यता दी है जिनमें से प्रमुख दवाएं परमेथ्रिन (Permethrin), डीडीटी (DDT डाईक्लोरो-डाईफेनाइल-ट्राईक्लोरोइथेन), डेल्टामैथ्रिन (Deltamethrin) हैं।

इनमें से DDT पहला कीटनाशक था जिसका प्रयोग मलेरिया मच्छरों पे छिडकाव करने के लिए किया गया था किन्तु बाद में लोग इसका प्रयोग कृषि कीटनाशी (agricultural insecticide) के रूप में करने लगे थे।

DDT के अधिक प्रयोग से मच्छरों में प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न हो गई तथा इसके कई सारे हानिकारक प्रभाव भी सामने आने लगे थे जिसके कारण बाद में कई देशों ने इसपे रोक लगा दी थी।

मलेरिया मच्छरों को मारने वाले एक कवक की खोज की गई है। यह कवक मच्छरों में जानलेवा रोग पैदा कर देता है। इस कवक के प्रति मच्छरों में अभी तक कोई प्रतिरोधक क्षमता भी नहीं देखी गई है। इसके छिडकाव से मलेरिया मच्छरों से छुटकारा मिल सकता है।

इसके अतिरिक्त मलेरिया से बचने के लिए निम्नलिखित उपाय करना चाहिए –

  1. अपने घर के आसपास के मच्छरों को नष्ट कर देना चाहिए
  2. रात को सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करना चाहिए
  3. ऐसे कपड़े पहनना चाहिए जिनसे पूरा शरीर ढँक जाए
  4. अपने घर की खिडकियों व दरवाजों पर लोहे की जाली लगवानी चाहिए
  5. घर के सभी कमरों एवं कोनों में मच्छरों का स्प्रे छिड़कना चाहिए
  6. अपने हाथों एवं पेरों तथा शरीर के अन्य भागों पर मच्छररोधी क्रीम का प्रयोग करना चाहिए
  7. साफ सुथरे कपड़ों को पहने
  8. भरपूर मात्रा में पानी पियें

मलेरिया के घरेलू उपाय (Home Remedies for Malaria in Hindi)

मलेरिया के घरेलू उपचार निम्नलिखित है –

तुलसी (Basil) का सेवन मलेरिया में लाभकारी

तुलसी का सेवन करने से मलेरिया बुखार ठीक होता है। इसके लिए 10-15  ग्राम तुलसी के पत्ते और 8 -10 कालीमिर्च को पानी के साथ पीसकर थोडा सा पेस्ट बना लें उसके बाद उसमे थोडा सा शहद मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करने से मलेरिया बुखार (Malaria ke upchar) ठीक हो जाता है।

खट्टे फलों (citrus fruits) का सेवन करने से दूर होगा मलेरिया

खट्टे फलों में विटामिन-सी पाया जाता है जो शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूती प्रदान करता है तथा संक्रमण को बढ़ने से रोकता है। इसके साथ ही खट्टे फलों का सेवन बुखार को कम करने में भी लाभकारी होता है।

निम्बू, अंगूर, संतरा आदि खट्टे फलों का सेवन करने से मलेरिया बुखार ठीक हो जाता है। इसके अतिरिक्त इन खट्टे फलों का जूस भी बनाकर पी सकते हैं। एक गिलास गर्म पानी में एक निम्बू निचोड़कर पिने से भी मलेरिया बुखार (malaria ka ayurvedic ilaj) ठीक होता है।

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दालचीनी (Cinnamon) और कालीमिर्च (Black Pepper) का सेवन से दूर करें मलेरिया

Cinnamon uses in malaria in hindi
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दालचीनी में सिनामेलडिहाइड (Cinnamaldehyde) नामक बहुत ही शक्तिशाली जैविक घटक पाया जाता है जिसमे सुजनरोधी (anti-inflammatory) गुण पाए जाते हैं तथा यह बुखार और दर्द को दूर करता है।

तीन कप पानी में आधा चम्मच कालीमिर्च पाउडर, एक चम्मच दालचीनी तथा एक चम्मच शहद को डालकर तीन-पांच मिनट तक गर्म करें तथा ठंडा होने पर प्रतिदिन दिन में दो से तीन बार पिने से मलेरिया बुखार ठीक हो जाता है।

इसके अतिरिक्त एक गिलास गर्म पानी में आधा चम्मच दालचीनी का पाउडर, तीन लौंग तथा पांच ग्राम चिरायता (absinthe) मिलाकर पिने से मलेरिया बुखार ठीक हो जाता है।

गिलोय (Giloy) का प्रयोग मलेरिया को भगाने में

गिलोय का सेवन मलेरिया के लिए बहुत ही लाभकारी होता है तथा इसका सेवन डेंगू जैसी बीमारी में भी किया जाता है। 50 ग्राम गिलोय को हल्का पीसकर मिटटी के घड़े या बर्तन में पानी भरकर पूरी रात ढंककर रखें उसके बाद सुबह उसे अच्छी तरह मिलाकर छान लें।

इसका सेवन प्रतिदिन दिन में तीन बार करने से मलेरिया बुखार में लाभ मिलता है। इसके अतिरिक्त गिलोय के पत्तों का काढ़ा बनाकर पिने से भी बुखार (malaria ke gharelu upay) में आराम मिलता है।

मलेरिया में फिटकरी (Alum) या भूने नमक (roasted salt) का सेवन

फिटकरी या खाने के नमक को तवे पे इतना भूने की इनका रंग बदल जाए या हल्का भूरा हो जाए। एक गिलास गर्म पानी में पांच ग्राम भूने हुए नमक को मिलाकर प्रतिदिन चार से पांच बार पिने से मलेरिया बुखार ठीक हो जाता है।

किशमिश (Raisin) और अदरक (Ginger) का सेवन करें मलेरिया में

अदरक में जीवाणुरोधी तथा मलेरियारोधी (antimalarial) गुण पाए जाते हैं जो शरीर में संक्रमण को दूर करने का कार्य भी करता है।

दो से तीन चम्मच कुचले हुए किशमिश और 20-25 ग्राम अदरक को दो बड़े कप पानी में डालकर इतना उबले की वह आधा रह जाए इसके बाद इसे गुनगुना होने दें। इसका सेवन प्रतिदिन दो या तीन बार करने से मलेरिया का बुखार (malaria ke gharelu upay) ठीक हो जाता है।

नीम (Neem) के पत्तों का सेवन मलेरिया में गुणकारी

चार-पांच नीम के पत्ते और पांच कालीमिर्च को एकसाथ पीसकर एक गिलास पानी में उबालें। उसके बाद गुनगुना रहने पर छानकर प्रतिदिन सेवन करें।

मेंथी के बीज (Fenugreek seeds) का सेवन करें मलेरिया में

मलेरिया में बुख़ार के कारण रोगी का शरीर कमजोर हो जाता है। मेंथी में कमजोरी को दूर करने का गुण पाया जाता है तथा मलेरिया के परजीवी से लड़ने की शक्ति भी पाई जाती है। यह प्रतिरक्षा तंत्र को शक्ति भी प्रदान करता है। मलेरिया के रोगी को मेंथी का सेवन करना चाहिए।

औषधीय चाय (Herbal tea) का प्रयोग करें मलेरिया बुखार में

herbs tea used in malaria
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हर्बल चाय में बहुत सारे औषधीय गुण पाए जाते है इसका सेवन करने से मलेरिया के कारण उत्पन्न हुए सिरदर्द और बुखार तथा अन्य कई प्रकार की समस्याएं ठीक हो जाती है। इसलिए मलेरिया के रोगी को हर्बल चाय का नियमित सेवन करना चाहिए।

प्लाज्मोडियम का जीवन चक्र (Life cycle of plasmodium in Hindi)

Plasmodium vivax ka jeevan chakra

प्लास्मोडियम का जीवन चक्र दो पोषकों में पूरा होता है –प्रथम – मनुष्य , द्वित्तीय – मादा एनोफिलिस मच्छर। इसलिए इसे द्विपोषदीय कहा जाता है।  प्लास्मोडियम का पहला पोषक मनुष्य होता है तथा दूसरा पोषक मादा एनोफिलिस मच्छर होता है। इसका अलैंगिक चक्र मनुष्य में होता है तथा लैंगिक चक्र और अलैंगिक गुणन मादा एनोफिलिस मच्छर में होता है। 

प्लास्मोडियम का संग्रह पोषक बन्दर होता है। बन्दर में भी प्लासमोडियम की वही अवस्थाएं पाई जाती है जो मनुष्य में पाई जाती है किन्तु बन्दर में मलेरिया रोग नहीं होता है और उसकी मृत्यु नहीं होती है।

मनुष्य में प्लास्मोडियम का जीवन चक्र दो स्थानों में पूरा होता है – यकृत (liver) और लाल रक्त कणिकाएं (Red blood cells)। यकृत में पूर्ण होने वाली सभी क्रियाओं को एक्सोएरिथ्रोसाइटिक चरण (Exoerythrocytic stage) तथा एरिथ्रोसाइटिक चरण (erythrocytic stage) कहते हैं।

प्लास्मोडियम का जीवन चक्र 

मलेरिया परजीवी (Malaria parasite) या प्लाज्मोडियम का प्रथम वाहक मादा एनोफ़िलीज़ मच्छर होता है। जब मच्छर संक्रमित मनुष्य को काटता है तो मनुष्य के रक्त के साथ मलेरिया परजीवी अर्थात प्लास्मोडियम मच्छर में प्रवेश कर जाता है तथा रक्त में उपस्थित मलेरिया परजीवी के जननाणु मच्छर के पेट में चले जाते हैं

वहां नर और मादा के रूप में विकसित होते हैं तथा नर और मादा मिलकर अंडाणु का निर्माण कर लेते हैं। ये अंडाणु मच्छर की अंतड़ियों (guts) में जाकर उनकी दीवार पे परिपक्व होते हैं। परिपक्व होने के बाद ये फूटकर बीजाणु का निर्माण करते हैं । ये बीजाणु उस मच्छर की लार ग्रंथियों में चले जाते हैं।

जब यह मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तो मनुष्य के शरीर में लार के साथ में बीजाणु भी प्रवेश कर जाते हैं। ये प्लास्मोडियम के बीजाणु लगभग आधे घंटे के अन्दर मनुष्य के यकृत (Liver) में चले जाते हैं और वहां अपनी संख्या बढ़ाते हैं।

उसके बाद प्लास्मोडियम लाल रक्त कणिकाओं पर आक्रमण करते है। और जब स्वस्थ मच्छर इस संक्रमित मनुष्य को काटता है तो ये परजीवी उसमे प्रवेश कर जाते है। इसी प्रकार यह चक्र चलता रहता है।

मलेरिया से जुड़े सवाल-जवाब (Some questions and answers [FAQs] related to malaria in Hindi) 

मलेरिया से जुड़े कुछ प्रश्न और उत्तर निम्नलिखित है –

क्या मलेरिया का उपचार किया जा सकता है ?

जी हाँ, मलेरिया का उपचार किया जा सकता है। यदि रोगी समय पर मलेरिया की दवाओं का सेवन करता है तो निश्चिन्त ही रोगी मलेरिया से छुटकारा पा सकता है। किन्तु मलेरिया का उपचार समय रहते नहीं किया गया तो मलेरिया का उपचार करना बहुत ही कठिन हो जाता है तथा कई स्तिथियों में तो मलेरिया के गंभीर परिणाम भी मिल सकते हैं।

क्या किसी व्यक्ति को एक से आधिक बार मलेरिया हो सकता है ?

हाँ, एक व्यक्ति में एक से अधिक बार मलेरिया रोग हो सकता है।

क्या मलेरिया अपने आप ठीक हो सकता है ?

नहीं, मलेरिया अपने आप ठीक नहीं होता है अगर कभी ठीक हो भी जाता है तो वापस मलेरिया हो सकता है।

मलेरिया किस परजीवी के कारण फैलता है ?

मलेरिया बुखार प्लास्मोडियम नामक परजीवी के कारण फैलता है जिसका वाहक मादा एनोफेलीज मच्छर होता है।

मलेरिया का कौनसा परजीवी सबसे खतरनाक होता है ?

मनुष्य में संक्रमण फ़ैलाने वाले मलेरिया परजीवी (Plasmodium) चार प्रकार के होते हैं। इनमें से सबसे खतरनाक मलेरिया परजीवी (malaria parasite) प्लास्मोडियम फैल्सीपैरम (Plasmodium falciparum) होता है। यह परजीवी पूरी दुनियां में मलेरिया से ग्रसित लोगों की 90% मौतों के लिए जिम्मेदार है।

मलेरिया किस प्रकार का रोग है?

मलेरिया या दुर्वात (Malaria) एक वाहक जनित संक्रामक रोग है जो प्लाज्मोडियम नामक प्रोटोज़ोआ परजीवी द्वारा फैलता है। यह एक संक्रामक रोग है। मलेरिया बुखार में रोगी को तेज ठंड एवं सर्दी रहती है और बार-बार बुखार आता रहता है।

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