दस्त (Diarrhea) – घरेलू उपाय, कारण व लक्षण। Loose motion in Hindi

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दस्त लगना मतलब पेट ख़राब होना। यह एक ऐसी समस्या है जो किसी भी मौसम में हो सकती है। किन्तु यह बीमारी ठण्ड यानि सर्दियों के दिनों में बहुत ही पीड़ादायक बन जाती है। इसका कारण पाचन तंत्र की खराबी होता है। यह समस्या बैक्टीरियल एवं वायरल इन्फेक्शन के कारण होती है।

पेट में मरोड़दस्त की समस्या खाने-पीने की गलत आदतों के कारण होती है। विशेषकर छोटे बच्चों और शिशुओं में यह बीमारी अधिक होती है। अधिक सर्दी या अधिक गर्मी के कारण भी बच्चों में पतली दस्त की समस्या आ सकती है।

यह समस्या लम्बे समय तक रहने पर पतले दस्त के कारण शरीर में पानी की कमी होने लगती है। जिससे शरीर में निर्जलीकरण या डिहाइड्रेशन (Dehydration) की समस्या उत्पन्न होने लगती है। इसलिए इस बीमारी का उपचार करना अति आवश्यक हो जाता है।

सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Centers of Disease Control and Prevention) के अनुसार वैश्विक स्तर पर दस्त या डायरिया (Loose motion) पांच साल से काम उम्र के बच्चों में होने वाली मौतों का दूसरा सबसे प्रमुख कारण है। बरसात के मौसम में यह समस्या अधिक बढ़ जाती है।

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स्त या डायरिया क्या है ? (What is Diarrhea or Loose motion in Hindi ?)

Diarrhea in hindi
Loose motion

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बार-बार पानी के समान गुदा मार्ग या अनल रीजन (Anal region) से मल निकलना दस्त या लूज मोशन कहलाता है। इसे हिंदी में अतिसार भी कहते हैं। दस्त होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इस बीमारी में व्यक्ति का पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है। जिसके कारण कुछ भी खाया-पीया पच नहीं पाता है और बिना पचा हुआ भोजन पतला होकर मल के साथ बाहर निकल जाता है।

दस्त (Diarrhea) में या तो बार-बार मल त्यागना पड़ता है या मल बहुत पतला आता है या दोनों ही स्थितियां हो सकती है। दस्त का अधिकांश भाग जल होता है जो थोड़े-थोड़े समय के अंतराल में आता रहता है। जिसके कारण शरीर में जल की कमी आ जाती है।

जल के साथ में मल से खनिज एवं अन्य आवश्यक पदार्थ जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स आदि की कमी आने लगती है। कभी-कभी इन पदार्थों की ज्यादा कमी आ जाती है कि रोगी मूर्छित या बेहोश हो जाता है और स्थिति अधिक बिगड़ने पर रोगी की मृत्यु भी हो सकती है। 

दस्त होने पर आँतों में सूजन आ जाती है और आँतों से सम्बंधित यह रोग रोटावायरस (Rotavirus) के कारण होता है। कभी-कभी यह ई. कोलाई और साल्मोनेला (Salmonella) जैसे बैक्टीरिया या जीवाणुओं के कारण भी हो सकता है। इसके आलावा अंग्रेजी दवाओं के साइड इफेक्ट्स के कारण भी दस्त या डायरिया (Diarrhea or Loose motion) हो सकता है।

आयुर्वेद में दस्त (Diarrhea in Ayurved in Hindi)

आयुर्वेद में दस्त या डायरिया को अतिसार कहा जाता है। यह बीमारी पाचन तंत्र एवं आँतों या जठरांत्र (Gastrointestinal) से सम्बंधित रोग है। आयुर्वेद में अतिसार होने का कारण दोष में असंतुलन होना है। हमारे शरीर में तीन दोष पाए जाते हैं – वात, पित्त और कफ। जो संतुलित अवस्था में होते हैं। इनके असंतुलन होने पर शरीर में कई प्रकार के रोग उत्पन्न होने लगते हैं।

इन तीनों दोषों में से जब वातदोष असंतुलित हो जाता है तो दस्त की समस्या होने लगती है जिसका उपचार समय पर नहीं किया गया तो शरीर कमजोर पड़ने लगता है। आयुर्वेद में अतिसार या दस्त के अलग-अलग अनगिनत उपाय बताये गए हैं जिनसे दस्त को ठीक किया जा सकता है।

अतिसार की समस्या कई कारणों से हो सकती है जैसे – अत्यधिक खाने, खानपान की गलत आदतों के कारण, अमा या माइक्रोबियल इंफेक्‍शन, भय एवं दुःख के कारण भी अतिसार या दस्त हो सकता है। कारण के आधार पर आयुर्वेद में 6 प्रकार के दस्त या अतिसार होते हैं –

वात अतिसार (Vat Atisar)

ये वात दोष के असंतुलित होने के कारण होता है। मल पतला, पेट दर्द, मुंह सूखना, कमजोरी आदि इसके लक्षण हैं।

पित्त अतिसार (Pitt Atisar)

पित्त दोष के असंतुलित होने के कारण होने वाला अतिसार या डायरिया। पीले या हरे रंग का मल निकलना, पेट में दर्द व जलन होना आदि इसके प्रमुख लक्षण होते हैं।

कफ अतिसार (Kaf Atisar)

कफ दोष के असुंतलन होने के कारण ये अतिसार होता है। इसके प्रमुख लक्षणों में सफ़ेद पतले मल के साथ म्यूकस, पेट में सूजन व दर्द होना है।

सन्निपातज अतिसार (Sannipataj Atisar)

इस प्रकार का अतिसार या डायरिया तीनों दोषों के असंतुलित हो जाने के कारण होता है।

आमा अतिसार (Ama Atisar) 

यह अतिसार बिना पचने वाले भोजन के दोष के साथ मिलने व उसे ख़राब करने के कारण होती है।

शोकज और भयज अतिसार

इस प्रकार का अतिसार शोक और भय के कारण होने वाले दस्त को कहते हैं। दुःख व डर जैसी भावनात्मक बातों के कारण वात और पित्त दोष ख़राब होते हैं जिससे बार-बार पतला मल आता है।

इसके अतिरिक्त कई बार वात एवं पित्त दोष का सम्बन्ध रक्त या ब्लड से भी होता है जिसके कारण रक्त अतिसार (blood diarrhoea) हो जाता है।

दस्त होने के कारण (Causes of Diarrhea or Loose motion in Hindi)

Causes of Loose motion or Diarrhea in hindi
Diarrhea causes in Hindi

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दस्त या डायरिया होने के पीछे कई सारे कारण हो सकते हैं। लूज मोशन बैक्टीरियल और वायरल इन्फेक्शन के कारण होता है। इसके अतिरिक्त डायरिया या लूज मोशन (Loose motion) के निम्नलिखित कारण होते हैं –

दस्त होने के मुख्य कारण –

कुअवशोषण या मालएब्जॉर्प्शन (Malabsorption) – 

मालएब्जॉर्प्शन सिंड्रोम एक ऐसा विकार है, जिसमें शरीर खाद्य पदार्थों से पोषक तत्वों को अवशोषित नहीं कर पाता है। जिसके कारण व्यक्ति को डायरिया होने का खतरा होता है।

सूजा आंत्र रोग या इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज,आईबीडी (inflammatory bowel disease) –

यह एक पाचन तंत्र से सम्बंधित एक ऐसी बीमारी है जो पेट से सम्बंधित कई समस्याओं का कारण बनती है। इस बीमारी के कारण पाचन तंत्र में दीर्घकालिक सूजन आ जाती है जिसके कारण मल में रक्त या खून जैसी दस्त आने का खतरा रहता है। इस रोग (इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज) के कारण मलाशय और बड़ी आंत के भीतरी हिस्से में अल्सर भी हो सकता है।

हार्मोनल विकार (Hormonal disorders) –

कई बार हार्मोनल विकार या हार्मोनल डिसऑर्डर के कारण भी डायरिया या लूज मोशन हो जाता है। उदहारण के लिए, जिन लोगों को एडिसन्स रोग (Addison’s disease) होता है उनमें स्टेरॉयड हार्मोन का लेवल पर्याप्त नहीं होता है जिसके कारण दस्त या डायरिया होने का खतरा अधिक होता है।

दवाइयों के कारण (Causes of Medicines) –

एंटीबायोटिक्स (Antibiotics) व लैक्सेटिव (Laxatives) जैसी दवाइओं के दुष्प्रभाव से भी डायरिया या दस्त हो सकता है।

मिर्च-मसाले व तले हुए पदार्थों के कारण –

अधिक मिर्च-मसालेदार और तले हुए पदार्थों के सेवन करने से भी दस्त जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

दस्त होने के अन्य कारण

  • अंतड़ियों या आँतों (entrails) में अधिक द्रव जमा होने के कारण
  • अंतड़ियों (Intestines) द्वारा तरल पदार्थ को कम मात्रा में अवशोषित करने से
  • अंतड़ियों में से मल के तीव्र गति से निकलने से
  • रात का बचा हुआ बसी भोजन खाने से
  • मल को अधिक रोककर रखने से
  • बाहर की तली हुई चीजों जैसे – कचोरी, समोसा, पिज्जा, बर्गर आदि का अधिक मात्रा में सेवन करने से
  • बेसन एवं मैदे से बनी चीजों का अधिक मात्रा में सेवन करने से
  • बहुत अधिक मात्रा में मीठी वस्तुओं का सेवन करने से
  • आवश्यकता से बहुत अधिक पानी पीने से
  • शोक, डर या भय, मानसिक तनाव के कारण भी दस्त हो सकता है।
  • इसके अतिरिक्त अस्वस्थ भोजन व दूषित जल का सेवन करने से पाचन तंत्र में संक्रमण हो जाता है जिसके कारण भी दस्त या डायरिया (Diarrhoea) हो सकता है।

दस्त के लक्षण (Symptoms of Diarrhea or Loose motion in Hindi)

Symptoms of Diarrhea or Loose motion in Hindi
Diarrhea symptoms in Hindi

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डायरिया या दस्त का मुख्य लक्षण विकृत दस्तों का बार-बार आना होता है। बहुत सारे लोग सिर्फ बार-बार मल त्यागने को ही दस्त समझते हैं किन्तु डायरिया के अन्य लक्षण भी होते हैं जैसे-

  • पेट में दर्द होना या कटाव होना
  • पेट फूलना या सूजन आना
  • पेट में ऐंठन होना
  • दस्त के साथ उल्टी होना
  • बार-बार मल त्यागने जाना
  • मल में खून आना और पानी जैसी दस्त आना
  • शरीर में निर्जलीकरण या डिहाइड्रेशन की समस्या होना
  • पेट दर्द के साथ-साथ बैचेनी महसूस होना
  • जी घबराना
  • बुखार आना

इसके अतिरिक्त छोटे बच्चों या शिशुओं में होने वाले दस्त को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। दस्त या डायरिया छोटे बच्चों एवं शिशुओं के लिए जानलेवा भी हो सकता है। अगर शिशुओं में निम्नलिखित लक्षण दिखाई देते हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें –

  • मल में मवाद या खून आना
  • काला मल आना
  • चिड़चिड़ापन होना
  • 102°F से अधिक बुखार आना
  • धंसी हुई आँखे
  • थकान व सुस्ती आना
  • मुंह का सुखना
  • पेशाब कम आना
  • सिरदर्द होना
  • अधिक नींद आना आदि

दस्त या डायरिया के प्रकार (Types of Diarrhea or Loose motion in Hindi)

दस्त मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है जो निम्नलिखित है –

उग्र अतिसार या एक्यूट डायरिया (Acute diarrhoea) – 

यह दस्त बहुत सामान्य प्रकार और आम रूप है। इस तरह के दस्त या डायरिया में बहुत ही पतला एवं पानी जैसी दस्त होती है। सामान्य रूप से पर्याप्त मात्रा में शरीर में तरल पदार्थों के जाते ही ये समस्या अपने आप ठीक हो जाती है।

जीर्ण अतिसार या क्रोनिक डायरिया (Chronic diarrhea) – 

क्रोनिक या जीर्ण डायरिया बहुत ही खतरनाक एवं जानलेवा होता है जिसका उपचार करना अति आवश्यक हो जाता है। जीर्ण डायरिया (Chronic लूसे motion) चार सप्ताह से अधिक समय तक रहता है।

इसके अतिरिक्त लगातार होने वाला डायरिया (Persistent diarrhea) भी होता है जिसका समय पर इलाज करना आवश्यक होता है। यह डायरिया दो सप्ताह से चार सप्ताह तक रहता है।

दस्त का निदान (Diagnosis of Diarrhea or Loose motion in Hindi)

डायरिया के निदान के लिए वैसे किसी भी तरह के मेडिकल टेस्ट की आवश्यकता नहीं होती है। इसके लक्षणों के आधार पर डायरिया का आसानी से पता किया जा सकता है। फिर भी दस्त या डायरिया के निदान के लिए कुछ टेस्ट होते हैं जिसके द्वारा डायरिया या अतिसार का निदान किया जाता है। ये टेस्ट हैं –

  1. उपवास रक्त परीक्षण या फास्टिंग ब्लड टेस्ट (fasting blood test) के द्वारा ये पता लगाने का प्रयास किया जाता है कि रोगी कि खाने की असहनीयता (Food intolerance) अथवा किसी प्रकार की एलर्जी के कारण तो दस्त की समस्या नहीं है।
  2. इमेजिंग टेस्ट (Imaging test) के द्वारा विशेषकर जिन लोगों की स्थिति गंभीर या क्रोनिक होती है उन लोगों के पेट की आँतों में सूजन और संरचनात्मक असामान्यताओं (structural abnormalities) का पता लगाया जाता है।
  3. स्टूल या यूरिन टेस्ट  के द्वारा बैक्टीरिया, परजीवी (parasites) या अन्य रोगकारकों (pathogens) का पता लगाया जाता है।

दस्त की रोकथाम (Prevention of Diarrhea or Loose motion in Hindi)

यदि समय रहते दस्त या डायरिया की रोकथाम कर लें तो दस्त होने से पहले ही इससे बचा जा सकता है। दस्त की रोकथाम करने के लिए आप निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें –

अधिक व स्वच्छ पानी पियें 

डायरिया या अतिसार से बचने का सबसे अच्छा उपाय है कि आप हमेशां साफ-सुथरा और अधिक पानी पीना चाहिए। अगर आप घर से बहार है तो हमेशा स्वच्छ पानी का इस्तेमाल करें नल व बाहर का पानी न पियें। अपने घर पर भी वाटर प्यूरीफायर का प्रयोग करें।

अच्छी स्वच्छता बनाये रखें 

हमेशा अच्छी स्वच्छता बनाये रखें और टॉयलेट या लेट्रिन करने के बाद अपने हाथों को साबुन या हैंडवाश से अच्छी तरह साफ करें। इसके अतिरिक्त खाना बनाने व खाने के पहले भी अपने हाथों को अच्छी तरह धोएं।

अधिक मिर्च मसाले व तले हुए पदार्थों को न खाएं 

दस्त होने का एक कारण मिर्च मसलों व तेलयुक्त पदार्थों का अधिक सेवन करना है। दस्त से बचने के लिए तेलयुक्त एवं मिर्च मसलों के अधिक सेवन से बचें। इसके अतिरिक्त बेसन और मैदे से बने पदार्थों का सेवन भी कम करना चाहिए।

रोटावायरस का टिका लगवाएं 

डायरिया होने का प्रमुख कारण रोटावायरस होता है। इससे बचने के लिए छोटे बच्चों (लगभग 1 साल) को रोटा वायरस वैक्सीन का टिका लगाया जाता है।

खाने पीने का ध्यान रखें 

दस्त से बचने या रोकथाम करने के लिए हमेशां शुद्ध भोजन का सेवन करे और बसी खाने का सेवन करने से बचें। इसके आलावा खाने व पकाने से पहले सब्जियों व फलों को अच्छी तरह धोयें और बचे हुए खाने को फ्रीज में स्टोर करें। ऐसे पदार्थों का सेवन न करें जो ख़राब हो गई हो।

दस्त के घरेलू उपचार (Home remedies for Diarrhea or Loose motion in Hindi)

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दस्त होने पर आप घर पर भी घरेलू उपायों की मदद से दस्त या डायरिया का इलाज (Diarrhea ka ilaj) कर सकते हैं। दस्त या डायरिया के घरेलू उपाय निम्नलिखित है –

इसबगोल से ठीक करें दस्त 

Isabgol uses in Diarrhea
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डायरिया को ठीक करने के लिए आप इसबगोल का सेवन कर सकते हैं। इसके सेवन से पेट में दर्द, गैस बनना और कब्जजैसी समस्याओं को भी ठीक करता है। प्रतिदिन एक बड़ी चम्मच इसबगोल पाउडर को दही में मिलकर खाने से दस्त ठीक हो जाती है।

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दस्त होने पर केले का सेवन करें 

केले में फाइबर पाया जाता है पाचन क्रिया को ठीक करता है। इसके आलावा केले में पाया जाने वाला पोटेशियम इलेक्ट्रोलिट्स की कमी को पूरी करके इलेक्ट्रोलाइट्स को संतुलित करता है। डायरिया या दस्त होने पर प्रतिदिन दिन में कम से कम तीन केले का सेवन करना चाहिए।

सेब का सेवन करें डायरिया में 

Apple uses in Diarrhea
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डायरिया होने पर आप सेब का सेवन भी कर सकते हैं। सेब में उच्च मात्रा में पेक्टिन (Pectin) पाया जाता है जो की एक प्रकार का फाइबर होता है। दस्त के रोगियों को प्रतिदिन दो सेब खाना चाहिए। याद रहे सेब के स्थान पे सेब के रस का सेवन न करें क्यूंकि रस में चीनी होती है जो दस्त के लिए ठीक नहीं होती है।

नींबू से करें दस्त का इलाज 

दस्त को ठीक करने के लिए नींबू भी फायदेमंद होता है। नींबू का सेवन करने से आँतों की सफाई हो जाती है। प्रतिदिन तीनों टाइम ( (सुबह-शाम और दोपहर) एक गिलास पानी में एक नींबू का रस मिलाकर पीने से दस्त ठीक हो जाती है। विशेषकर जिन लोगों को आंव आने या मरोड़ आने की समस्या हो उनके लिए यह दस्त का रामबाण इलाज (dast ka ramban ilaj) है।

गाजर सूप से डायरिया का उपचार 

Carrot uses in diarrhea in hindi
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डायरिया या लूज मोशन होने से पाचन तंत्र ख़राब हो जाता है जिसे ठीक करने के लिए आप गाजर का सूप पे सकते हैं। गाजर का सूप पीने से पाचन शक्ति मज़बूत होती है। इसलिए प्रतिदिन गाजर का सूप पियें।

सौंफ का सेवन डायरिया (Loose motion) में लाभकारी 

दस्त होने पर सौंफ का इस्तेमाल भी फायदेमंद होता है। प्रतिदिन सुबह-शाम आधा चम्मच भूने हुए सौंफ और आधा चम्मच कच्ची सौंफ को मिलाकर सेवन करने से दस्त ठीक हो जाती है।

अदरक से होगा डायरिया का घरेलू इलाज 

अदरक में दर्द नाशक और पेट सम्बंधित बिमारियों का उपचार करने का गुण पाया जाता है। अदरक को भूनकर उसका अच्छा सा पेस्ट बना ले, फिर उसे एक गिलास हलके गर्म पानी में मिलाये उसके बाद उसमे एक बड़ा चम्मच शहद मिलाकर प्रतिदिन दिन में तीन बार सेवन करने से डायरिया में लाभ मिलता है।

जीरे का सेवन दस्त के इलाज में 

डायरिया या लूज मोशन को ठीक करने के लिए आप जीरे का प्रयोग भी कर सकते है। इसके लिए एक चम्मच भूने हुए जीरे या क्यूमिन के चूर्ण को दही या छाछ में मिलाकर पियें। दस्त में लाभ मिलेगा।

बबूल की पत्तियों से करें डायरिया का आयुर्वेदिक इलाज 

बबूल का सेवन पेचिस व पेट सम्बंधित बिमारियों के लिए लाभदायक होता है। दस्त के आयुर्वेदिक इलाज (Dast ke ayurvedik ilaj) में बबूल महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एक गिलास बबूल की पत्तियों के रस में एक चम्मच काले जीरे का पाउडर मिलाकर पीने से से दस्त में लाभ मिलता है।

इसके अतिरिक्त बबूल के पेड़ की छाल का काढ़ा बनाकर पी सकते है। इन दोनों विकल्पों में से कोई एक प्रतिदिन दिन में दो बार कर सकते है।

बैल है डायरिया का घरेलू इलाज 

दस्त को ठीक करने का घरेलू इलाज में बैल भी लाभकारी होता है। पके हुए बैल के गुदा के एक चम्मच को आधी गिलास दही के साथ मिलाकर खाने से दस्त में लाभ मिलता है।

अर्जुन की पत्तियों का सेवन लाभदायक डायरिया में 

लूज मोशन (Loose motion) एवं पेट सम्बंधित बिमारियों के आयुर्वेदिक इलाज में अर्जुन की पत्तियों का रस या छाल का काढ़ा लाभकारी होता है। इसके अलावा यह पेचिस में भी लाभदायक होता है। एक गिलास पानी में अर्जुन की पत्तियों को उबालकर पिने से दस्त में लाभ मिलता है। ऐसा प्रतिदिन दिन में दो से तीन बार कर सकते हैं। 

इसके अतिरिक्त अर्जुन के वृक्ष की छाल का काढ़ा भी दिन में दो बार पिने से भी डायरिया में लाभ मिलता है। आप इन दोनों उपायों में से कोई एक उपाय कर सकते हैं।

कच्चा पपीता भी लूज मोशन में लाभदायक

कच्चे पपीते का सेवन करने से भी दस्त में लाभ मिल सकता है। इसलिए प्रतिदिन कच्चे पपीते को टुकड़ों में काटकर उबालें और उसका सेवन करने से डायरिया में भी लाभ मिलता है।

कैमोमाइल चाय पियें दस्त में लाभदायक 

कैमोमाइल चाय पेट दर्द से राहत दिलाती है और यह आँतों के लिए भी फायदेमंद होती है। दस्त को ठीक करने के लिए भी इस चाय का प्रयोग किया जाता है। दस्त या लूज मोशन की समस्या होने पर रोज दिन में तीन बार कैमोमाइल चाय (chamomile tea) पियें। दस्त में लाभ मिलता है।

धनिये का सेवन भी डायरिया या अतिसार के उपचार में फायदेमंद 

दस्त होने पर आप धनिये (Dhaniya) से भी लूज मोशन का घरेलू इलाज (loose motion home treatment) कर सकते हैं। दस्त होने पर रोगी को पानी की अधिक आवश्यकता होती है। इसलिए प्रतिदिन लगभग एक लीटर पानी में एक बड़ा चम्मच धनिया पाउडर मिलाएं और आधा रह जाने तक उबालें। उसके बाद ठंडा कर थोड़ी-थोड़ी देर में रोगी को थोड़ा-थोड़ा पीना चाहिए।

दस्त में खाएं मूंग दाल की खिचड़ी 

आपको पता होगा की दस्त या डायरिया होने पर पाचन तंत्र ख़राब हो जाता है और ठीक से काम करना बंद कर देता है। जिसे ठीक करने के लिए दस्त या लूज मोशन के रोगी को ऐसा भोजन नहीं करना चाहिए जो भरी हो। इसलिए रोगी को हमेशा हल्का भोजन ही दस्त में करना चाहिए।

इसके लिए आप चावल एवं मूंग दाल की खिचड़ी का सेवन करें। ये भोजन हल्का होता है जो आसानी से पांच भी जाता है। इनके साथ में आप दही या मट्ठा का सेवन भी कर सकते हैं।

कचनार के फूलों का प्रयोग करें डायरिया में 

दस्त को ठीक करने के लिए कचनार के फूलों का सेवन भी लाभदायक होता है। इसके लिए कचनार के दो चार फूलों को पीस कर चीनी के शर्बद में मिलाकर प्रतिदिन खाना खाने से पहले अथवा बाद तीनों टाइम सेवन करें। इसका सेवन करने से बार-बार दस्त आने की शिकायत ठीक हो जाती है।

पुदीने की चाय लाभकारी दस्त में 

पुदीना पेट की समस्याओं को ठीक करने में सहायता करता है। यह पेट दर्द व पेट की गैस को भी ठीक करता है। इसके आलावा आप इसका इस्तेमाल दस्त होने पर भी कर सकते हैं। प्रतिदिन दिन में तीन बार पुदीने या पिपरमिंट की चाय पियें। इससे दस्त या डायरिया में लाभ मिलेगा।

दालचीनी का सेवन करें दस्त में 

दालचीनी जठरांत्र सम्बन्धी समस्याओं के इलाज में बहुत लाभकारी है। इसके साथ दस्त की समस्या को ठीक करने के लिए भी दालचीनी का प्रयोग आयुर्वेद में होता है। इसमें विषाणुरोधी (Antivirus) एवं जीवाणुरोधी (anti-bacterial) गुण पाए जाते है जो पेट में उपस्थित जीवाणुओं एवं विषाणुओं को ख़त्म कर देती है।

इसके लिए एक चम्मच दालचीनी का पाउडर व आधा चम्मच अदरक का पाउडर एक गिलास उबलते पानी में अच्छी तरह मिलाकर आधे घंटे के लिए रख दें। इस मिश्रण को प्रतिदिन दस्त के रोगी को दिन में तीन बार पीना चाहिए।

दस्त या डायरिया के अन्य घरेलू उपाय (Others home treatment for Diarrhea or Loose motion in Hindi) –

  • 50-50 ग्राम गंगाधर चूर्ण व बिल्वादि या बिल्व चूर्ण और 5-5 ग्राम कर्पदक भस्म व शंख भस्म के चूर्ण को मिलाकर प्रतिदिन सुबह शाम आधा-आधा चम्मच दस्त के रोगी को सेवन करना। चाहिए इससे लाभ मिलेगा।
  • सूखी धनिया, नागरमोथा, मुस्ता व अतिविष के चूर्ण को लगभग एक लीटर पानी में तब तक उबले जब तक वह आधा लीटर न रह जाये। उसके बाद ठंडा करके छान लें और रोगी को प्रतिदिन दिन में तीन चार बार पीने से दस्त ठीक ही जाती है।
  • 1 गिलास पानी में 1 छोटा चम्मच चीनी, आधा छोटा चम्मच नमक और 1 छोटा चम्मच नींबू का रस मिलाकर मिश्रण बना लें। यह मिश्रण प्रतिदिन दस्त के रोगी को प्रत्येक दो या तीन घण्टे बाद पीना चाहिए। यह पतले दस्त रोकने का बहुत ही कारगर उपाय है।
  • जामुन और आम की गुठली के चूर्ण को आधा चम्मच भूनी हुई हरड़ के साथ सेवन करने से दस्त में शीघ्र लाभ मिलता है।
  • कुटजारिष्ट 20 ml व जीरकाद्यरिष्ट 20 ml को एक साथ मिलाकर सुबह-शाम नाश्ते और खाने के बाद देना चाहिए।
  • जब दस्त कम होने लगे तो शुण्ठी, कालीमिर्च, मरिच, अतीस व हिंगु के चूर्ण को समान मात्रा में लेकर मिला लें। इससे भूख बढ़ता है और ये पाचन क्रिया को मजबूत बनाते हैं।

नोट – अच्छे परिणाम के लिए किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

दस्त में रोगी का खानपान व जीवनशैली (Diet and Lifestyle in Diarrhea or Loose motion in Hindi)

दस्त होने पर रोगी का खानपान एवं जीवनशैली निम्नलिखित तरह की होनी चाहिए –

  • दस्त के रोगी को मसूर की दाल का सूप, मूंग की दाल एवं खिचड़ी , मट्ठा, दही, दलिया, लौकी एवं बिना तेल वाला खाना खाना चाहिए।
  • बाहर का खाना जैसे कि – पिज्जा, बर्गर, कचौरी, समोसा पेस्ट्री, तैलीय भोजन, मिर्च-मसाले वाला खाना नहीं खाना चाहिए। इनसे पेट अधिक ख़राब हो जाता है और पाचन क्रिया ठीक से नहीं हो पाती है।
  • रात का बासी भोजन नहीं करना चाहिए।
  • पानी को उबालकर और छानकर ही पीना चाहिए
  • मटर व उड़द की दाल, कटहल, ककड़ी, खीरा, खीर, पूरी, बेसन और मैदा से बनी चीजें नहीं खानी चाहिए।
  • सुबह के समय पौष्टिक आहार जैसे दलिया आदि खाना चाहिए
  • धूम्रपान एवं शराब का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • लेट्रिन करने के बाद एवं खाना खाने से पहले हाथों को अच्छी तरह धोना चाहिए
  • शामको खाना खाने के पश्चात् थोड़ा घूमना चाहिए जिससे कि भोजन अच्छी तरह पच जाता है।
  • अधिक समय तक भूखा नहीं रहना चाहिए। भूख लगने पर भोजन कर लेना चाहिए।
  • दस्त में मैथुन या सम्भोग नहीं करना चाहिए।
  • कोई भी शारीरिक व्यायाम नहीं करना चाहिए।

दस्त में बच्चों का खानपान व जीवनशैली (Children diet and lifestyle in Diarrhea in Hindi)

बच्चों में डायरिया या लूज मोशन की समस्या होने पर उनकी जीवनशैली एवं खानपान निम्नलिखित प्रकार का होना चाहिए –

  • बच्चों को दस्त होने पर ताज़ा फलों का रस पिलाना चाहिए
  • यदि बच्चा एक साल से छोटा हो तो सूप व फलों का रस देना चाहिए
  • बच्चों को हरी सब्जियों का सूप, छाछ या मट्ठा, चावल का पानी आदि बार-बार पिलाना चाहिए। ऐसा करने से बच्चों में डिहाइड्रेशन की समस्या दूर होती है।
  • बच्चों को ओ.आर.एस. का घोल पिलाना चाहिए
  • यदि घर पर ओ.आर.एस. नहीं हो तो आप एक गिलास पानी में एक चम्मच नमक व एक चम्मच शक्कर या चीनी को डालकर गर्म कर उसे ठंडा करके पिलाना चाहिए।
  • बच्चों को कोई भी खिलौना या वस्तु मुंह में न लेने दें
  • बच्चों को बाहर का खाना जैसे कि पानीपुरी, कचौरी, समोसे, पिज्जा, बर्गर आदि न खिलाएं
  • बच्चे एवं उसकी वस्तुओं और खिलौनों की सफाई का पूरा ध्यान रखना चाहिए।

 

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