गुर्दे की पथरी (Kidney stone in Hindi) – कारण, लक्षण व घरेलू उपाय

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भारत में किडनी की पथरी की समस्या दिनोदिन बढ़ती जा रही है। पथरी की समस्या का मुख्य कारण व्यक्ति का आहार और जीवनशैली है। गुर्दे की पथरी (gurde ki pathri) एक प्रकार की क्रिस्टलीय पदार्थ होता है जो मूत्र मार्ग और वृक्क (Kidney) में कहीं भी हो सकता है। किडनी स्टोन छोटे-छोटे कंकड़ जैसे होते है जो मिनरल्स और साल्ट के मिश्रण से मिलकर बनते है।

पथरी का आकार रेत के छोटे दानों से लेकर गोल्फ की गेंद जितना बड़ा हो सकता है। इनमें से किडनी स्टोन (gurde ki pathri ka ilaaj) का छोटा पत्थर मूत्र के साथ बहकर निकल जाता है। किन्तु यदि किडनी की पथरी 5mm से बड़ी हो तो वह मूत्रमार्ग में रूकावट उत्पन्न कर सकता है। जिसके कारण पेट में दर्द होने लगता है।

लोगों में पथरी की समस्या बढ़ती जा रही है। भारत में यह समस्या लगभग प्रत्येक 100 में से 15 लोगों को हो सकती है। इसका कारण आज का खानपान और लाइफस्टाइल है। यह एक बहुत ही दर्दनाक समस्या है जो स्त्रियों की तुलना में पुरुषों में अधिक होती है। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए हम बहुत सारे घरेलू उपाय बताने जा रहे है। इन घरेलु नुस्खों को अपनाकर आप गुर्दे की पथरी से घर पर ही छुटकारा पा सकते हैं।

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गुर्दे की पथरी क्या होती है? (What is Kidney Stone in Hindi)

gurde ki pathri kidney stone in hindi
Kidney stone

हमारे शरीर में उत्सर्जन तंत्र होता है जो शरीर के व्यर्थ पदार्थों को शरीर से फ़िल्टर करके बाहर निकालने का कार्य करता है। किन्तु यदि इसमें खराबी आ जाये तो शरीर के व्यर्थ पदार्थ (waste material) बाहर नहीं निकल पाएंगे और शरीर का संतुलन ही बिगड़ जाता है।

किडनी की पथरी (kidney mein pathri) एक वृक्क या गुर्दे का रोग है जो मूत्र नलिका (urinary canal) या किडनी में होता है। इस रोग में गुर्दे या किडनी या मूत्रमार्ग में छोटे-छोटे या बड़े कंकड़ों या पथरी का निर्माण हो जाता है जिसके कारण किडनी ठीक प्रकार से कार्य नहीं कर पाती है और पेट में दर्द होने लगता है। वृक्क में एक समय में एक या एक से अधिक पथरी हो सकती है।

सामान्य रूप से यदि पथरी का आकार छोटा होता है तो वो सरलता से वृक्क से बाहर निकल जाती है। किन्तु यदि पथरी सामान्य से बड़ी (लगभग 3 से 5 mm) हो तो यह गुर्दे या मूत्र वाहिका (urinary vessel) में फंस जाती है और युरेटर या मूत्र नली में अवरोध उत्पन्न करती है। परिणामस्वरूप किडनी, मूत्र नली, पेट, कमर के निकट असहनीय पीड़ा (Pain) होने लगता है जिसे रीनल कोलिक (left renal calculus in hindi) कहा जाता है।

यह समस्या सामान्य रूप से 30 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्तियों में अधिक पायी जाती है जो स्त्रियों की अपेक्षा पुरुषों में अधिक (लगभग 4 गुना अधिक) पायी जाती है। गुर्दे या मूत्रवाहिका की पथरी (gurde mein pathri) अधिकतर वयस्कों में अधिक होती है और छोटे बच्चों और वृद्ध व्यक्तियों में यूरिनरी ब्लैडर या मूत्राशय (urinary bladder) की पथरी अधिक होती है।

किडनी की पथरी (kidney stone in hindi) चार प्रकार की होती है – यूरिक एसिड स्टोन (uric acid stone), कैल्शियम स्टोन (calcium stone), स्ट्रुवाइट स्टोन (Struvite stones) और सिस्टीन स्टोन (Cystine stone)। इनमें से यूरिक एसिड स्टोन और कैल्शियम स्टोन वाली पथरी सबसे अधिक होती है।

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आयुर्वेद में गुर्दे की पथरी (Kidney Stone in Ayurved in Hindi)

आयुर्वेद में पथरी को अश्मरी कहा जाता है। इस अश्मरी का आकार जब सामान्य से बड़ा होता है तो यह वृक्क या मूत्र मार्ग में फंस जाती है जिसके कारण मूत्र त्याग करने में समस्या होती है तथा वृषण से लेकर लिङ्ग व मूत्राशय और आसपास दर्द होने लगता है। आयुर्वेद के अनुसार अश्मरी (pathri ke bare mein) की समस्या तब होती है जब वात दोष बढ़ जाता है और पित्त के साथ कफ को सूखा देता है। जिससे किडनी में पथरी (ureteric calculus in hindi) बन जाती है। 

जब वात दोष के कारण अश्मरी (kidney stone in hindi) छोटे-छोटे टुकड़ों के साथ मूत्रमार्ग से बाहर निकलती है तो इसे शर्करा कहते है।

गुर्दे की पथरी के लक्षण (Kidney Stone Symptoms in Hindi) 

Kidney stone symptoms in hindi गुर्दे की पथरी के लक्षण
गुर्दे की पथरी

यदि पथरी के लक्षणों की बात करें तो सबसे सामान्य लक्षण यह है कि किडनी स्टोन की समस्या होने पर पेट के एक तरफ और कमर व आसपास के भाग में रह रहकर दर्द होता है। इसके अतिरिक्त भी गुर्दे में अश्मरी या पथरी के लक्षण (stone pain symptoms in hindi) होते है जो यह संकेत देते हैं की उस व्यक्ति को पथरी की समस्या है।

किडनी स्टोन के निम्नलिखित लक्षण होते है –

  • पेट के एक तरफ (बाएं या दाएं) दर्द होना
  • पीठ के निचले भाग और कमर के आसपास के भाग में दर्द होना
  • मूत्र त्याग करते समय परेशानी होना और दर्द होना
  • बार-बार मूत्र आना (kidney stone symptoms in hindi) किन्तु खुलकर करने में कठिनाई होना
  • कभी-कभी मूत्र के साथ में रक्त आना
  • मूत्र में दुर्गन्ध आना
  • जी घबराना और उल्टी होना
  • ज्वर आना और पसीना आना आदि

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गुर्दे की पथरी के कारण (Kidney Stone causes in Hindi) 

किडनी में स्टोन (pathri mein) होने के अलग-अलग कई कारण होते है अर्थात पथरी के अलग-अलग प्रकार के अलग-अलग कारण होते हैं। वृक्क की पथरी होने के निम्नलिखित कारण होते है –

  • अनुवांशिकता (Heredity)

पथरी की समस्या अनुवांशिक भी हो सकती है। यदि आपके परिवार के किसी व्यक्ति या सदस्य को इस प्रकार की समस्या है तो उनकी आने वाली पीढ़ी को भी किडनी स्टोन की समस्या हो सकती है। अधिकतर कैल्शियम की मात्रा में वृद्धि के कारण भी पथरी की समस्या हो सकती है। ऐसे में मूत्र में उपस्थित कैल्शियम की अधिक मात्रा एक पीढ़ी से अगली पीढ़ी यानि पीढ़ी-दर-पीढ़ी संचरित हो सकती है।

  • आहार (Diet)

यदि आपका खानपान या आहार सही नहीं है तो भी पथरी की समस्या (pathri ki problem) हो सकती है। यदि आपके भोजन में चीनी, प्रोटीन और नमक की मात्रा आवश्यकता से अधिक है तो भी वृक्क की पथरी होने का खतरा बढ़ जाता है। जो व्यक्ति नमक का सेवन आवश्यकता से अधिक करता हो उसको यह बीमारी होने की सम्भावना अधिक होती है।

  • पानी कम पीने से (Drinking less water)

जो लोग पानी कम पीते हैं इन लोगों को भी गुर्दे की स्टोन होने का खतरा अधिक होता है। सामान्य रूप से व्यक्ति को एक दिन में गर्मियों में 12 से 16 गिलास तथा ठण्ड के दिनों में 8 से 10 गिलास पानी पीना चाहिए।

  • अंतर्निहित रोग (Underlying diseases)

किसी व्यक्ति में कुछ ऐसी बीमारियां ऐसी होती हैं जिनके कारण किडनी स्टोन की समस्या (right renal calculus in hindi) हो सकती है जैसे – सिस्टिक फाय्ब्रोसिस (Cystic fibrosis), इंफ्लेमेटरी बाउल रोग (Inflammatory bowel disease, IBD) और रीनल ट्यूबलर एसिडोसिस (Renal tubular acidosis) आदि। अगर किसी व्यक्ति को इनमें से कोई रोग हो तो यह बीमारी होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

  • मोटापा (obesity)

यदि किसी व्यक्ति को मोटापा की समस्या है तो उसे भी पथरी की समस्या (pathri ki problem) होने की सम्भावना बढ़ जाती है। न सिर्फ मोटापा बल्कि किसी व्यक्ति के कमर का आकार और बॉडी मास्स इंडेक्स (body mass index, BMI) भी बहुत अधिक है तो भी गुर्दे की पथरी की समस्या हो सकती है।

  • विशेष भौगोलिक क्षेत्र

जो लोग किसी ऐसे विशेष भौगोलिक स्थान में निवास करते जहाँ गर्म जलवायु हो और पर्याप्त मात्रा में द्रव पदार्थों का सेवन नहीं होता हो, तो ऐसे व्यक्तियों को भी पथरी की समस्या (pathri ki problem) अधिक रहती है। इन क्षेत्रों में भारत के पंजाब, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र व गुजरात जैसे राज्य सम्मिलित है। जहाँ पर गर्म जलवायु अधिक रहती है।

  • कुछ प्रकार की दवाएं

कुछ ऐसी दवाएं होती हैं जिनका अधिक मात्रा में सेवन करने से भी पथरी की समस्या हो सकती है। इन दवाओं में मुख्यतः कैल्शियम वाले एंटासिड्स और  ड्यूरेटिक्स (Diuretics) हैं। इनका सेवन अधिक करने पर मूत्र में कैल्शियम की मात्रा बढ़ सकती है जिसके कारण भी पथरी बढ़ जाती है। इसके अतिरिक्त विटामिन ए एवं डी का अधिक सेवन भी पथरी को जन्म दे सकता है।

इसके अतिरिक्त एचआईवी (HIV) के इलाज में उपयोग होने वाली इन्डिनावीर (Indinavir) दवाई के अधिक सेवन से भी इन्डिनावीर पथरी का निर्माण हो सकता है। इन दवाइयों के अतिरिक्त भी कुछ अन्य दवाएं होती है जिनसे भी किडनी स्टोन (pathri ke bare mein) हो सकता है।

किडनी स्टोन होने के अन्य कारण –

  • निर्जलीकरण के कारण
  • मूत्र में रसायनो (Camicals) की अधिकता के कारण
  • जिन लोगों की उम्र 35 से 55 वर्ष के बीच है उन लोगों को भी वृक्क में अश्मरी की समस्या अधिक होती है।
  • जंक फूड का अति सेवन करने से
  • गैस्ट्रिक बाईपास सर्जरी के कारण
  • कैल्शियम के अवशोषण को बढ़ाने वाले इंफ्लेमेटरी बाउल रोगों (Inflammatory bowel disease) के कारण
  • विटामिन ए और विटामिन डी की अधिकता के कारण
  • शरीर में खनिज पदार्थों की कमी
  • हाइपरथाइरॉयडिज़्म (Hyperthyroidism) के कारण भी गुर्दे में स्टोन की समस्या हो सकती है।
  • जिन स्त्रियों में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होता है तथा जिनके अंडाशय (ovaries) निकले हुए हैं उन स्त्रियों को भी पथरी (pregnancy me kidney stone in hindi) की समस्या हो सकती है।

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गुर्दे की पथरी के प्रकार (Kidney Stone types in Hindi) 

किडनी स्टोन के जो प्रकार होते हैं वो निम्नलिखित हैं –

  1. कैल्शियम स्टोन (Calcium Stone in Hindi)
  2. यूरिक एसिड स्टोन (Uric Acid Stone in Hindi)
  3. स्ट्रूवाइट स्टोन (Struvite Stone in Hindi)
  4. सिस्टीन स्टोन (Cystine Stone in Hindi)

गुर्दे की पथरी से बचाव (Kidney Stone prevention in Hindi)

किडनी में स्टोन न हो इसके लिए से निम्नलिखित उपाय करना चाहिए –

  • प्रतिदिन पर्याप्त मात्रा में पानी पियें
  • मांस का सेवन न करें क्यूंकि इसका सेवन करने से यूरिक एसिड बढ़ता है
  • जंक फ़ूड, पैक्ड फ़ूड आदि का सेवन करने से बचें
  • शरीर में कैल्शियम की कमी न होने दें क्यूंकि कम कैल्शियम के कारण भी पथरी की समस्या हो सकती है।
  • कच्चा चावल, उड़द और चने का अधिक सेवन करने से बचें
  • बैंगन और टमाटर के बीजों से भी पथरी बढ़ जाती है इसलिए इनका सेवन भी कम करना चाहिए।
  • आहार में नमक की मात्रा कम करें क्यूंकि इसमें पाए जाने वाले सोडियम से पथरी की समस्या हो सकती है।
  • तरल पदार्थों का सेवन अधिक करें
  • फल एवं हरी सब्जियों का सेवन अधिक करें
  • नियमित रूप से योग और व्यायाम करें

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किडनी की पथरी का परिक्षण (Kidney Stone test in Hindi)

गुर्दे की पथरी की जाँच के लिए निम्नलिखित परिक्षण या टेस्ट किये जा सकते हैं –

  1. अल्ट्रासोनोग्राफी (Ultrasonography for Kidney Stone) – पेट की पथरी (pet ki pathri) के परिक्षण के लिए निदान विशेषज्ञ रोगी की अधिकतर अल्ट्रासोनोग्राफी ही करते हैं।
  2. सीटी स्कैन (CT Scan for Kidney Stone) – सीटी स्कैन एक प्रकार का इमेजिंग टेस्ट होता है जिसकी सहायता से पेट के भीतर की इमेज तैयार की जाती है। इसका इस्तेमाल चिकित्सक या विशेषज्ञ पथरी की जाँच करने के लिए भी किया जा सकता है।
  3. अल्ट्रासाउंड (Ultrasound for Kidney stone) – अधिकतर चिकित्सक पथरी का टेस्ट कराने के लिए अल्ट्रासाउंड की ही सलाह देते हैं।
  4. ब्लड टेस्ट (Blood test for Kidney stone) – रक्त परिक्षण के द्वारा आपके रक्त में यूरिक एसिड और कैल्शियम की जाँच की जाती है। यह देखा जाता है कि शरीर में इनकी मात्रा बढ़ तो नहीं रही है।
  5. यूरिन टेस्ट (Urine test for Kidney stone) – गुर्दे की स्टोन को डायग्नोसिस करने के लिए डॉक्टर रोगी के मूत्र की विशेष तरीके से जाँच भी कर सकते हैं।

पथरी के घरेलू उपाय (Home remedies for Kidney Stone in Hindi)

किडनी स्टोन का उपचार (pathri ka desi ilaaj) करने के लिए बहुत सारी औषधियां और घरेलू नुस्खे उपलब्ध हैं। इन घरेलू उपायों को अपनाने के साथ में दिन में लगभग 10 से 12 गिलास या पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीने से पथरी की समस्या ठीक नहीं होती है। किडनी स्टोन के घरेलू उपाय निम्नलिखित हैं –

पथरी में फायदेमंद होता है धनिया (Coriander for Kidney stone treatment in Hindi)

किडनी स्टोन के इलाज में हरा धनिया बहुत ही लाभदायक होता है। इसकी हरी पत्तियों में गुर्दे की पथरी को ठीक करने का गुण पाए जाते हैं। यह एक ऐसा तरीका है जिससे कम खर्च में ही किडनी की पथरी निकली जा सकती है। धनिए में बहुत सारे आयुर्वेदिक गुण पाए जाते हैं। यह मूत्र (Urine) को भी ठीक प्रकार से निकालने में सहायता करता है। किडनी सम्बन्धित रोगों के लिए यह रामबाण औषधि है।

पयोग करने की विधि –

सबसे पहले 15 ग्राम हरे धनिए की पत्तियों को अच्छी तरह पानी में दो से तीन बार धो लें। उसके बाद उसे डंडी समेत पत्तियों को तोड़कर मिक्सर में थोड़े से शुद्ध पानी के साथ में अच्छे से पीस लें। उसके बाद उसे छानकर उसमें लगभग आधा लीटर पानी मिलाकर प्रतिदिन सुबह खाली पेट पूरा जूस पी जाएं। यह प्रक्रिया 15 से 20 दिनों तक दोहराने से पथरी निकलने होने लगती है और वृक्क में दर्द होना बंद हो जाता है। इस नुस्खे के दौरान दिन में लगभग 5 लीटर से अधिक पानी का सेवन करना चाहिए।

किडनी स्टोन में बड़ी इलायची और खरबूजे के बीज के फायदे (Black cardamom & Muskmelon seeds for Kidney Stone treatment in Hindi)

काली इलायची में धमनियों की रुकावट को खोलने का गुण पाया जाता है। यह रक्त चक्र को भी ठीक प्रकार से चलने में सहायक होता है। इसके अतिरिक्त खरबूजे के बीजों में भी हृदय सम्बन्धित बीमारियों को दूर करने का गुण पाया जाता है। इसमें पोटैशियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने का गुण भी पाया जाता है।

सेवन करने की विधि –

दो बड़ी इलायची के दाने और थोड़े से खरबूजे के बीज तथा साथ में थोड़ी सी धागे वाली मिश्री तीनों को एक छोटी गिलास पानी में रात को भिगोकर रख दें। सुबह जब काली इलायची और खरबूजे के बीज फूल जाए तो खाली पेट चबाकर खाने के बाद वही पानी ऊपर से पी जाए। ऐसा प्रतिदिन करने से 10 से 15 दिनों में लाभ देखने को मिलेगा।

पत्थरचट्टा से निकालें किडनी की पथरी (Patharchatta for Kidney Stone in Hindi)

पत्थरचट्टा को ब्रियोफिलम (Bryophyllum)भी कहते हैं। यह वृक्क से पथरी को निकालने में सहायता करता है। इसका सेवन करने से पथरी सरलता से मूत्र मार्ग द्वारा बाहर निकल जाती है।

पत्थरचट्टा का सेवन कैसे करें –

इसके लिए दो विधियां हैं। किडनी स्टोन के इलाज के लिए दोनों में से कोई एक विधि का ही सेवन करें।

विधि 1 – सबसे पहले एक गिलास पानी में दो से चार पत्थरचट्टा के पत्तों को उबालकर काढ़ा बना लें। उसके बाद ठंडा होने दें और एक चम्मच शहद व 500 मिलीग्राम शिलाजीत अच्छे से मिला लें। इसका सेवन प्रतिदिन दिन में लगभग तीन बार खाली पेट करने से पथरी किडनी से गलकर निकलने लगती है। यह प्रक्रिया तब तक दोहराएं जब तक पथरी निकल न जाए।

विधि 2 – इसके लिए प्रतिदिन सुबह खाली पेट पत्थरचट्टा के पत्ते (pathri ki dava batao) चबाकर खाएं। पत्तों का सेवन करने के आधे घण्टे तक कुछ भी नहीं खाना चाहिए। पत्ते यदि छोटे हो तो दो से तीन पत्तों का सेवन करें और यदि बड़े हो तो एक या दो पत्तों का ही सेवन करें।

कुल्थी से दूर होगी गुर्दे की पथरी (Horse Gram for Kidney Stone in Hindi)

किडनी के रोगों के इलाज हेतु कुल्थी बहुत ही लाभदायक होती है। इसका पानी पीने से किडनी स्टोन (pathri ka gharelu ilaaj) टूटकर मूत्र के साथ बाहर निकल जाती है। कुल्थी (Kulthi) में आयरन और पॉलीफेनाइल अच्छी मात्रा में पाया जाता है। यह पथरी के दर्द को दूर करने में भी लाभदायक होती है।

कुल्थी का सेवन कैसे करें –

इसके लिए 50 ग्राम कुलथी को अच्छी तरह शुद्ध जल से धो लें और एक गिलास गुनगुने पानी में रातभर भीगो दें। प्रतिदिन सुबह खाली पेट कुल्थी के पानी को पिएं और बची हुई कुल्थी को वापस एक गिलास गुनगुने पानी में भीगो दें और शामको खाली पेट सेवन करें। कुल्थी के पानी का सेवन करने के आधे घंटे तक कुछ भी न खाएं। यह प्रक्रिया 3 से चार महीने तक लगातार करने से पेट की पथरी निकल जाती है और दर्द से भी छुटकारा मिल जाता है।

आंवले के चूर्ण से हटाएं किडनी की पथरी (Amla for Kidney Stone in Hindi)

amla for kidney stone in hindi
Amla in kidney stone

आंवले का चूर्ण पीने से किडनी स्टोन ही नहीं बल्कि कई सारी बीमारियां ठीक हो सकती है। आंवले का सेवन करने से मूत्र में जलन भी दूर होती है। इसमें विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसके अलावा इसमें एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी बैक्टिरियल, कैल्शियम और अन्य कई प्रकार के औषधीय गुण पाए जाते हैं। जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को भी शक्तिशाली बनाता है।

आंवले का सेवन कैसे करें –

सबसे पहले आंवले या उसके बीजों के एक चम्मच पावडर को एक गिलास गुनगुने पानी (यदि ठंड के दिन हो तो अन्यथा सादा पीने का पानी) में अच्छी तरह से घोलकर प्रतिदिन सुबह खाली पेट सेवन करें। यह प्रक्रिया लगातार दोहराने से 15 दिनों में दर्द ठीक होने लगेगा और इसके साथ में दिनभर में लगभग 10 गिलास पानी पिएं।

पथरी से छुटकारा दिलाता है प्याज (Onion for Kidney Stone treatment in Hindi)

प्याज में ऐसे औषधीय गुण विद्यमान रहते हैं जो शरीर की सुंदरता को बढ़ाने और बालों को अच्छा रखने में सहायक होते हैं। किंतु गुर्दे की स्टोन को ठीक करने में भी प्याज रामबाण (pathri ka gharelu ramban ilaj) होता है। इसमें आयरन, एंटी-कार्सिनोजेनिक (Anti-carcinogenic), एंटी-एलर्जिक (Anti-allergic) व एंटी-ऑक्सीडेंट (Anti-oxydent) गुण पाए जाते हैं जो कई प्रकार की बीमारियों को दूर करने में कार्य करते हैं।

प्याज का इस्तेमाल कैसे करें –

इसके लिए 2 से 3 प्याज को काटकर दो गिलास पानी में उबालें। बाद में ठंडा कर दें और उसके बाद मिक्सर में पीस लें। अब इस रस को छानकर प्रतिदिन सुबह खाली पेट सेवन करें। यह कार्य लगभग एक महीने तक करने से पथरी निकलने लगती है।

अलसी का काढ़ा पीएं किडनी स्टोन में होगा लाभ (Flaxseeds benefits for Kidney Stone in Hindi)

अलसी गुर्दे संबंधित रोगों में बहुत ही लाभदायक सिद्ध होती है। इसके बीजों में फाइबर पाया जाता है। यह न सिर्फ पथरी को बाहर निकलती है बल्कि मूत्र (Urine) में कैल्शियम की मात्रा को भी कम बनाए रखने में सहायक होती है जिससे पथरी दुबारा नहीं होती है।

अलसी का सेवन कैसे करें –

एक गिलास पानी में दो चम्मच अलसी के बीजों को उबालें। इसमें आप अलसी के छीले हुए या बिना छीले दोनों में से कोई से भी बीजों का प्रयोग कर सकते हैं। उबालने के बाद छानकर गर्मागर्म काढ़े को दिन में कभी भी खाली पेट सेवन करें। 15 से 20 दिनों में पथरी बाहर निकल जाती है और यदि पथरी बड़ी हो तो इस नुस्खे को 1 से डेढ़ माह तक अपनाएं। अलसी के काढ़ा किडनी का विषहरण (detoxification) करता है जिससे पथरी पर दबाव बनता है और पथरी बाहर निकल जाती है।

किडनी की पथरी में अनार जूस पिएं (Pomegranate juice for Kidney Stone treatment in Hindi)

गुर्दे में पथरी होने पर रोगी के लिए अनार का जूस लाभदायक होता है। इसकी क्षारीय प्रकृति और पाए जाने वाले पोटैशियम के कारण खनिज क्रिस्टल्स (Mineral crystals) को बनने से रोकता है जिससे पथरी को समस्या वापस नहीं होती है। प्रतिदीन एक गिलास अनार जूस का सेवन करें और इसके साथी ही अपने सलाद के साथ में भी अनार का सेवन करने से पथरी में लाभ होता है।

गुर्दे की पथरी में सेब का सिरका फायदेमंद (Apple Cider Vinegar for Kidney Stone treatment in Hindi)

Apple uses in kidney stone
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आजकल एप्पल साइडर विनेगर का उपयोग बहुत ही समान्य हो गया है। किडनी स्टोन को बाहर निकालने में भी सहायक होता है। इसमें एसिटिक अम्ल (Acetic acid) पाया जाता है। जो कैल्शियम को पिघालकर किडनी से बाहर निकाल देता है। इसके अतिरिक्त यह किडनी की स्टोन से होने वाले दर्द से भी आराम दिलाता है।

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गुर्दे की पथरी में रोगी का आहार व जीवनशैली (Diet & Lifestyle in Kidney Stone in Hindi)

किडनी स्टोन की समस्या होने पर रोगी को बहुत अधिक दर्द का सामना करना पड़ता है। पथरी को निकालने के लिए बहुत सारे घरेलु व आयुर्वेदिक उपाय हैं जिनकी सहायता से पथरी को निकाला जा सकता है। घरेलू उपायों के साथ-साथ रोगी का खानपान और जीवनशैली कैसी होनी चाहिए वो निम्नलिखित हैं –

गुर्दे की पथरी में रोगी का आहार (Diet in Kidney Stone in Hindi)

किडनी स्टोन में रोगी का आहार निम्नलिखित होना चाहिए –

गुर्दे की पथरी में क्या खाएं – 

  • कैल्शियम स्टोन की समस्या में पर्याप्त मात्रा वाले पौधे आधारित पदार्थों का सेवन करें और अपने चिकित्सक से पूछें की कैल्शियम का सबसे अच्छा फल या सब्जी कौनसी है।
  • पौधे आधारित प्रोटीन का सेवन करें जैसे – सोयाबीन से सम्बंधित पदार्थ एवं सूखे मेवे जैसे की काजू, बादाम पिस्ता आदि
  • अधिक मात्रा में पानी पियें
  • नारियल पानी एवं अन्य फलों व औषधियों का रस (pathri ki dava batao) पियें
  • बेकिंग सोडा व सेब के सिरके का सेवन कर सकते हैं
  • मुनक्के का पानी पियें

गुर्दे की पथरी में क्या न खाएं –

  • अधिक सोडियम युक्त पदार्थों का सेवन न करें जैसे – नमक व फ़ास्ट फ़ूड आदि
  • पशु प्रोटीन का सेवन बंद कर दें जैसे – मांस खाना, अंडे खाना, मछली, पनीर, घोंगा व डेयरी उत्पाद आदि
  • जिन लोगों को कैल्शियम ऑक्सालेट (calcium oxalate) वाली पथरी की समस्या हैं उनको अधिक ऑक्सोलेट वाले पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए या कम करना चाहिए जैसे पालक, साबुत अनाज, मूंगफली, स्ट्रॉबेरी, वीट ब्रेन जिमीकंद या शकरकंद, चुकुन्दर आदि
  • डिब्बा बंद पदार्थों व जंक फ़ूड और फ़ास्ट फ़ूड (pathri ke bare mein) जैसे पदार्थों का सेवन न करें
  • उड़द, चना, बेंगन व टमाटर के बीज, कच्चा चावल आदि का सेवन करने से पथरी बढ़ सकती हैं। इसलिए इनका सेवन करने से बचना चाहिए।
  • शरीर में यूरिक एसिड न बढ़ें इसके लिए मांसाहार का सेवन न करें और अन्य ऐसे पदार्थों का सेवन न करें जिनसे यूरिक एसिड बढ़ता हो।

गुर्दे की पथरी का उपचार (Allopathic treatment for Kidney Stone in Hindi)

किडनी की पथरी का इलाज (gurde mein pathri ka ilaaj) करने के लिए निम्नलिखित तरीके उपलब्ध है –

परक्यूटेनियस नेफ्रोलिथोटॉमी सर्जरी (percutaneous nephrolithotomy surgery)

परक्यूटेनियस नेफ्रोलिथोटॉमी सर्जरी (PCNL surgery in Hindi) द्वारा किडनी में पायी जाने वाली बड़े आकार की पथरी को निकाला जाता है। इस तकनीक में रोगी की किडनी में नेफ्रोस्कोप (Nephroscope) डालकर मूत्रपथ के माध्यम से बड़े आकार की पथरी को निकाला जाता है।

इस तकनीक का इस्तेमाल तब किया जाता है जब पथरी इतनी बड़ी हो कि वह गुर्दों को हानि पहुंचा रही हो, संक्रमण करती हो, दर्द नियंत्रित नहीं हो रहा हो या जिसे सहा नहीं जा रहा हो आदि।

लिथोट्रिप्सी तकनीक (lithotripsy technique)

गुर्दे की पथरी का इलाज (gurde ka ilaj) करने के लिए लिथोट्रिप्सी का भी उपयोग किया जाता है। इस तकनीक में ध्वनि तरंगों का प्रयोग किया जाता है। किडनी से मूत्राशय (urinary bladder) के बीच वाली नली में यदि पथरी है तो ध्वनि तरंगों के माध्यम से उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ दिया जाता है जिससे पथरी मूत्रमार्ग से सरलता से बाहर निकल जाती है।

यूरेटेरोस्कोपी (Ureteroscopy, URS)

इस तकनीक में एक उपकरण होता है जिसका नाम यूरेटेरोस्कोप (Ureteroscope) है। इसके ऊपर के भाग में कैमरा होता है और मध्य में लचीली ट्यूब और दूसरे भाग में लैंस लगा होता है। इसके ऊपर के भाग को मूत्र मार्ग में डालकर ब्लैडर व यूरिन ट्यूब की इमेज तैयार करके किडनी स्टोन का पता लगाया जाता है और उसे निकाला जाता है।

मेडिसिन्स (Medicines)

इनके अतिरिक्त पेट की पथरी (gurde ka ilaj) होने पर डॉक्टर कुछ दवाओं के सेवन का भी परामर्श दे सकते हैं। इन दवाओं में दर्दनाशक व संक्रमण से बचने के लिए एंटीबायोटिक्स सम्मिलित हैं। ये दवाएं (pathri ki dava batao) निम्नलिखित हैं –

  • सोडियम बाइकार्बोनेट (Sodium bicarbonate for Sodium citrate)
  • एलोप्यूरिनॉल (Allopurinol)
  • मूत्रवर्धक दवाएं (diuretic drugs)
  • फास्फोरस घोल (Phosphorus solution)

इनके अतिरिक्त डॉक्टर अन्य दर्दनाशक और एंटीबायोटिक्स भी दे सकते हैं।

गुर्दे की पथरी से जुड़े प्रश्न-उत्तर (Questions & answers [FAQs] related to Kidney Stone in Hindi)

किडनी की स्टोन से जुड़े सवाल व जवाब निम्नलिखित हैं –

पथरी क्यों होती है?

पथरी होने का प्रमुख कारण शरीर में पानी की कमी होना है। इसके अतिरिक्त मूत्र में रसायनों की अधिकता, विटामिन डी की अधिकता व जंकफूड व बाहरी भोजन के अधिक सेवन करने से गुर्दे में पथरी की समस्या हो सकती है।

गुर्दे की पथरी से कैसे बचा जा सकता है?

यदि आप यह कामना करते हैं कि किडनी स्टोन (gurde mein pathri) की समस्या होये ही नहीं तो इससे बचने के लिए पथरी से बचाव के उपाय करने चाहिए और पर्याप्त मात्रा में जल का सेवन करना चाहिए।

गुर्दे की पथरी की पहचान कैसे करें?

किसी व्यक्ति को पथरी की समस्या है या नहीं। इसका पता तब तक नहीं चल सकता है जब तक पथरी बड़ी न हो तथा दर्द या समस्या न दे रही हो। जब पथरी छोटी होती है तो इसके लक्षण दिखाई नहीं देते हैं किन्तु जब पथरी बड़ी हो जाती है तो पेट में दर्द होने लगता है तथा मूत्र में जलन और कभी-कभी रक्त भी आने लगता है।

इस स्थिति में किडनी की पथरी (kidney mein pathri) की पहचान करने की आवश्यकता होती है। पहचान करने के लिए अलग-अलग प्रकार के टेस्ट होते है।

किडनी स्टोन से कौन-कौन सी समस्याएं हो सकती है?

किडनी की पथरी होने पर रोगी को निम्नलिखित समस्याएं हो सकती है –

  • पथरी की समस्या हमेशां गुर्दे में ही नहीं रहती है। कभी-कभी वह मूत्र मार्ग में भी चली जाती है। मूत्र मार्ग की नली बहुत पतली व नाजुक होती है जिसके कारण पथरी मूत्रमार्ग में फंस जाती है जिससे मूत्र में खून आने लगता है और पेट में ऐंठन की समस्या हो सकती है
  • किडनी की पथरी यदि मूत्रवाहिनी में फंस जाती है तो मूत्र के प्रवाह को रोक सकती है। ऐसे में मूत्र त्यागते समय अधिक दबाव डालने से किडनी ख़राब हो सकती है तथा किडनी में संक्रमण की समस्या हो सकती है।
  • मूत्रमार्ग में पथरी फंस जाने के कारण मूत्रवाहिनी ब्लॉक (kidney stone symptoms in hindi) होने का खतरा हो सकता है
  • किडनी का संक्रमण या मूत्र का संक्रमण होने का भी खतरा हो सकता है।

किडनी की होम्योपैथिक दवा के नाम बताइये

गुर्दे में किडनी स्टोन को समस्या होने पर होम्योपैथी (homeopathic medicine for kidney stone in hindi) में निम्नलिखित दवाइयां चिकित्सक के द्वारा रोगी को दी जा सकती है –

  • थलासपी बरसा पास्टोरिस (Thlaspi Bursa Pastoris)
  • अर्जेंटम नाइट्रिकम (Argentum Nitricum)
  • सारसापरिला (Sarsaparilla)
  • बेलाडोना (Belladonna)
  • परेरा ब्रावा (Pareira Brava)
  • बेन्जोइक एसिड (Benzoic Acid)
  • लाइकोपोडियम क्लेवेटम (Lycopodium Clavatum)
  • बर्बेरिस वल्गैरिस (Berberis Vulgaris)
  • डायोस्कोरिया विलोसा (Dioscorea Villosa)
  • कैंथरिस (Cantharis)
  • कोकस कैक्टि (Coccus Cacti) (homeopathic medicine for kidney stone in hindi)

गुर्दे की पथरी को कैसे रोका जा सकता है? या पथरी का इलाज कैसे किया जाता है?

आज के समय में पथरी की समस्या बढ़ती जा रही है। इसको रोकने के लिए बहुत सारे उपचार उपलब्ध है। आयुर्वेद में भी पथरी या वृक्क अश्मरी के कई प्रकार के इलाज (gurde ka ilaj) उपलब्ध है जिनको अपनाकर किडनी स्टोन की समस्या को रोका जा सकता है। इनके अतिरिक्त कई सारे घरेलू उपाय भी है जिनकी सहायता से पथरी को रोका जा सकता है।

किडनी की पथरी होने पर डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?

जब किडनी स्टोन (gurde ki pathri) अधिक बड़ी हो और जिसके कारण अन्य समस्याएं हो रही हो तथा घरेलू उपायों से ठीक नहीं हो रही हो। तो इस स्थिति में रोगी को नेफ्रोलॉजिस्ट के पास अपना उपचार कराने जाना चाहिए। 

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