हार्ट ब्लॉकेज – लक्षण, कारण व घरेलू उपाय Heart blockage symptoms in Hindi

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किसी भी व्यक्ति के स्वस्थ रहने के लिए उसके हार्ट यानि ह्रदय का स्वस्थ रहना बहुत आवश्यक है। स्वस्थ ह्रदय (Heart) के बिना शरीर भी सही तरीके से नहीं चल सकता है। जब हार्ट में कोई समस्या आ जाती है तो कई प्रकार की समस्याएं होने लगती है। इनमें से एक है हार्ट ब्लॉकेज (Heart blockage symptoms in Hindi)

हार्ट ब्लॉकेज (Heart blockage) की समस्या लोगों में पहले की तुलना में बढती जा रही है। इसका प्रमुख कारण ख़राब खानपान और जीवनशैली है। यह एक बहुत ही गंभीर रोग है जिसमें ह्रदय की धड़कन कम हो जाती है। यह रोग किसी भी उम्र में हो सकता है किन्तु यह बीमारी अधिकतर 30 से 35 वर्ष की उम्र में होती है।

यह एक ऐसी बीमारी है जिसका समय पर उपचार नहीं किया जाता है तो मृत्यु भी हो सकती है। इसलिए इस बीमारी में देरी नहीं करना चाहिए और तुरंत इसका इलाज कराना चाहिए। लोग हार्ट ब्लॉक (Heart blockage symptoms in Hindi) की समस्या होने पर बहुत अधिक घबराने लगते हैं किन्तु इसमें घबराने की नहीं बल्कि बिना घबराये तुरंत उपचार की आवश्यकता होती है।

कुछ लोगों में हार्ट ब्लॉक की समस्या जन्म से होती है। इसे जन्मजात हार्ट ब्लॉकेज कहते हैं। जब किसी स्त्री के गर्भ में ही शिशु का ह्रदय ठीक तरीके से विकसित नहीं होता है तो उस शिशु को जन्मजात हार्ट ब्लॉक की समस्या का सामना करना पड़ता है। इस की समस्या को ठीक करने के लिए बहुत सारे आयुर्वेदिक व घरेलू उपाय उपलब्ध हैं। उनका वर्णन निचे किया गया है।

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हार्ट ब्लॉकेज क्या होता है? (What is Heart blockage in Hindi)

heart blockage in hindi
Heart blockage

एक स्वस्थ मनुष्य का ह्रदय एक मिनट में 72 बार धड़कता है। एक धड़कन (Heart beat) में ह्रदय की मांसपेशियां एक बार संकुचित होती है जो पुरे शरीर में रक्त को स्पंदित (pump) करती है। सामान्य रूप से ह्रदय की प्रत्येक धड़कन एक विद्युत संकेत (electrical signal) के द्वारा उत्पन्न होती है जो ह्रदय के दाये आलिंद (Right atrium) के साइनस नोड (Sinus node) में शुरू होती है।

इसके बाद ये विद्युत संकेत एन्ट्रीओवेंट्रिकुलर या एवी नोड (atrioventricular or AV node) तक जाते हैं। यह एक विशेष कोशिकाओं का समूह होता है जो एट्रिया और वेंट्रिकल के मध्य ह्रदय के केंद्र (Center) में होती है। एवी नोड इलेक्ट्रिकल सिग्नल को वेंट्रिकल में जाने से पहले धीमा कर देता है। इस कारण इसे रिले स्टेशन (Relay station) भी कहते हैं। 

उसके पश्चात ये इलेक्ट्रिक संकेत एन्ट्रीओवेंट्रिकुलर या एवी नोड (atrioventricular or AV node) से ह्रदय की आंतरिक दीवारों पर बने कार्डियक फाइबर (Cardiac fiber) के समूह वाले निलय (ventricle) में पहुँचते हैं। इन फाइबर वाले समूहों को एवी बंडल (AV bundle) कहते हैं जो दोनों निलय (Ventricle) के लिए दो भागों विभक्त होते हैं।

ये ही बंडल ह्रदय के निलय में विधुत आवेगों का परिचालन (Operation) करते हैं। इस प्रकार जब विद्युत संकेत निलय या वेंट्रिकल में पहुँचते हैं तब शरीर में रक्त पंप होता है। 

क्या होता है हार्ट ब्लॉकेज या दिल की रूकावट? 

ह्रदय की धड़कन को नियंत्रित करने वाले इन विद्युत संकेतों के अवरुद्ध होने या देरी आने के कारण दिल को सामान्य रूप से धड़कने में समस्या होती है और ह्रदय सामान्य से कम धड़कता है। ह्रदय धड़कन प्रति मिनट 30 से 40 तक कम हो जाती है। विद्युत संकेतों के पूर्ण रूप से बंद होने पर ह्रदय ब्लॉक हो जाता है जिसके कारण ह्रदय को रक्त पंप करने में समस्या आ जाती है।

हार्ट ब्लॉकेज (Heart blockage symptoms in Hindi) की यह समस्या कोलेस्ट्रॉल, फाइबर ऊतक, वसा और सफ़ेद रक्त कणिकाओं के मिश्रण के कारण होता है। यह मिश्रण नसों की आंतरिक दीवारों पर चिपक जाता है। जिसके कारण नसें अवरुद्ध हो जाती है और रक्त का प्रवाह कम हो जाता है।

हार्ट ब्लॉक के प्रकार (Types of Heart blockage in Hindi)

हार्ट ब्लॉक की समस्या जन्म से भी हो सकती है और बाद में भी हो सकती है। धमनी में किसी भी प्रकार की बाधा या प्रतिरोध के कारण ह्रदय में रक्त की पूर्ति नहीं हो सकती है और रक्त के थक्के (Clots) बनने लगते हैं। इससे हार्ट अटैक या दिल का दौरा पड़ सकता है जिसे तीव्र रोधगलन दौरे (Acute myocardial infarction) कहते हैं।

हार्ट ब्लॉक के प्रकार Heart blockage ke prakar
Heart blockage types

हार्ट ब्लॉकेज (Heart blockage symptoms in Hindi) के प्रकार निम्नलिखित होते हैं –

प्रथम डिग्री का हार्ट ब्लॉक (First degree Heart block in Hindi)

फर्स्ट डिग्री के हार्ट ब्लॉक में विद्युत संकेत या इलेक्ट्रिकल सिग्नल निलय (ventricle) तक पहुँचते तो हैं परन्तु इनकी गति सामान्य स्थिति की तुलना में बहुत धीमी हो जाती है। इसीजी (ECG) पर इसे 200ms से अधिक के पिआर के अंतराल पर नापा जाता है।

द्वितीय डिग्री का हार्ट ब्लॉक (Second degree Heart block in Hindi)

सेकंड डिग्री के हार्ट ब्लॉक को भी दो भागों में विभाजित किया जा सकता है-

  1. यह सेकंड डिग्री का कम गंभीर वाला हार्ट ब्लॉक का प्रकार होता है। इसमें जब तक ह्रदय की स्पंदन एक लय या ताल में ना चले अर्थात ह्रदय की धड़कन में अंतर न आ जाये तब तक निलय या वेंट्रिकल तक पहुँचने वाले इलेक्ट्रिक संकेत धीमे होते जाते हैं।
  2. इस प्रकार के हार्ट ब्लॉक में एक ओर विद्युत संकेत लगातार निलय (Ventricle) तक पहुँच रहे होते हैं एवं दूसरी ओर कुछ संकेत वहीँ नहीं पहुँच पाते हैं। इसके कारण ह्रदय की स्पंदन धीमी हो जाती है।

तृतीय डिग्री का हार्ट ब्लॉक (Third degree Heart block in Hindi)

थर्ड डिग्री के हार्ट ब्लॉक में अलिंद (atrium) से निलय (Ventricle) तक पहुँचने वाले विद्युत संकेत (Electric signals) पूर्ण रूप से ब्लॉक हो जाते हैं। थर्ड डिग्री हार्ट का शरीर पर बहुत बुरा असर पड़ता है। क्यूंकि इसमें ह्रदय की शरीर में रक्त पहुँचाने की क्षमता बहुत ही कम हो जाती है।

इस समस्या को कम करने के लिए वेंट्रिकल पेसमेकर (Ventricular pacemakers) का सहारा लिया जा सकता है किन्तु इसमें ह्रदय की धड़कन सामान्य से धीमी ही रहती है और यह विकल्प अधिक दिनों तक कार्य नहीं कर पाता है।

हार्ट ब्लॉकेज के लक्षण (Heart blockage symptoms in Hindi) 

प्रत्येक हार्ट ब्लॉकेज के लक्षण (Heart blockage symptoms in Hindi) भिन्न-भिन्न होते हैं अर्थात हार्ट ब्लॉक के लक्षण इसके प्रकारों पर निर्भर करते हैं। प्रत्येक प्रकार के लक्षण अलग होते हैं। इसमें ह्रदय की स्पंदन या धड़कन असामान्य हो जाती है जिसके कारण ह्रदय रक्त को ठीक से पंप नहीं कर पाता है।

किसी आलिंद (Atrium) के ह्रदय की स्पंदन अनियमित होने पर उस स्थिति एट्रियल कहते हैं और यदि निलय या वेंट्रिकल में ह्रदय की धड़कन अनियमित होती है तो इस स्थिति को वेंट्रिकुलर (ventricular) कहा जाता है।

हार्ट ब्लॉक के लक्षणों (Heart blockage symptoms in Hindi) को उनके प्रकारों के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है, जो निम्नलिखित हैं-

प्रथम डिग्री हार्ट ब्लॉक के लक्षण (First degree Heart blockage symptoms in Hindi)

फर्स्ट डिग्री हार्ट ब्लॉकेज के लक्षण निम्नलिखित हैं-

  1. इस प्रकार के हार्ट ब्लॉक का कोई विशेष लक्षण नहीं होता है
  2. इसमें इलेक्टिक सिग्नल्स की गति सामान्य से धीमी होती है
  3. नियमित इसीजी के द्वारा इसका पता लगाया जा सकता है
  4. यह हार्ट ब्लॉक युवाओं और वयस्कों में होना सामान्य है

द्वितीय डिग्री हार्ट ब्लॉक के लक्षण (Second degree Heart blockage symptoms in Hindi)

सेकंड डिग्री हार्ट ब्लॉक के लक्षण निम्नलिखित हैं –

  1. साँस लेने में समस्या आन
  2. छाती में दर्द होना
  3. थकान महसूस करना
  4. चक्कर आना
  5. तेजी से साँस लेना
  6. मतली या उबकाई आना
  7. कुछ स्थितियों में मूर्छित या बेहोंश हो जाना

तृतीय डिग्री हार्ट ब्लॉक के लक्षण (Third degree Heart blockage symptoms in Hindi)

थर्ड डिग्री हार्ट ब्लॉक के लक्षण (Heart blockage symptoms in Hindi) निम्नलिखित हैं –

  1. ह्रदय की धड़कन बहुत अधिक धीमी हो जाना
  2. सीने में तेज दर्द होना
  3. बहुत तेजी से साँस लेना
  4. साँस लेने में समस्या होना
  5. चक्कर आना
  6. सिर चकराना
  7. बेहोंश होना
  8. गर्दन, जबड़े और पीठ में दर्द होना
  9. ऊपरी पेट और गले में दर्द होना
  10. हाथ पैर सुन्न हो जाना आदि

थर्ड डिग्री के लक्षण सेकंड डिग्री की तुलना में अधिक गंभीर और खतरनाक होते हैं और इसमें तत्काल उपचार की आवश्यकता होती है। इसका उपचार करने में थोड़ी सी भी देरी नहीं करनी चाहिए।

हार्ट ब्लॉकेज के कारण (Heart blockage causes in Hindi)

हार्ट ब्लॉक होने के कई सारे अलग-अलग कारण हो सकते हैं। कुछ गिने चुने लोगों में यह समस्या जन्मजात भी होती है। इसका अभिप्राय यह है कि कुछ लोगों को हार्ट ब्लॉक की समस्या जन्म से ही हो सकती है। यदि गर्भ के भीतर शिशु का ह्रदय ठीक से विकसित नहीं होता है तो उसे जन्म से ही दिल की रूकावट (Heart blockage symptoms in Hindi) की बीमारी हो सकती है।

जन्मजात हार्ट ब्लॉक की समस्या के अतिरिक्त जो हार्ट ब्लॉक के सामान्य कारण होते हैं उनमें ह्रदय की सर्जरी, ह्रदय की मांसपेशियों में सूजन से सम्बंधित बीमारियां जैसे – कार्डियोमायोपैथी (Cardiomyopathy), जीनों में परिवर्तन, हार्ट वाल्व की समस्या, हार्ट फलिएर और हार्ट अटैक के कारण भी हार्ट ब्लॉकेज की समस्या आ सकती है।

इसके अतिरिक्त कुछ पदार्थों की कमी या अधिकता के कारण भी यह समस्या उत्पन्न हो सकती है जैसे- कैल्शियम, मैग्नेशियम और पोटेशियम आदि पदार्थों की मात्रा में कमी या अधिकता के कारण भी हार्ट के ब्लॉक (Heart blockage symptoms in Hindi) की समस्या आ सकती है।

दिल के ब्लॉकेज का एक कारण सफ़ेद रक्त कोशिकाओं, फाइबर टिस्सुस, वसा और कोलेस्ट्रॉल आदि का मिश्रण भी हो सकता है। यह मिश्रण नसों की भीतरी दीवारों पर चिपक जाता है। जिसके कारण भी हार्ट ब्लॉक की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। हार्ट ब्लॉक की समस्या जिन कारणों से हो सकती है उनको कुछ बिंदुओं के माध्यम से समझते हैं –

  • ह्रदय की सर्जरी के समय होने वाली त्रुटि
  • ह्रदय की मांसपेशियों से सम्बंधित बीमारियां जैसे – कार्डियोमायोपैथी
  • हार्ट अटैक से ह्रदय को पहुँचने वाली क्षति
  • धमनियों में होने वाली रूकावट
  • कुछ पदार्थों की अधिकता या कमी के कारण
  • हार्ट फैलियर
  • किसी दवाओं के दुष्प्रभाव
  • जींस में परिवर्तन
  • जन्मजात हार्ट ब्लॉकेज (congenital heart block) – जो कि गर्भ में ही शिशु का ह्रदय ठीक से विकसित नहीं होना

हार्ट ब्लॉकेज के घरेलू उपाय (Home remedies for Heart blockage in Hindi)

जिस तरह से आज का खानपान और जीवन पद्धति ख़राब हो गई है उसी प्रकार से लोगों में बीमारियां कम होने का नाम नहीं ले रही है। उन्ही बीमारियों में एक समस्या हार्ट ब्लॉकेज (Heart blockage symptoms in Hindi) की भी है। हार्ट ब्लॉक की समस्या लोगों में अब धीरे-धीरे बढ़ रही है। जिसको कम करने के लिए कुछ घरेलू उपचार नीचे बताये जा रहे हैं।

इन घरेलू उपायों (Heart blockage home remedies in Hindi) की सहायता से आप बड़ी ही सरलता से घर बैठे हार्ट ब्लॉकेज की समस्या को ठीक कर सकते हैं। हार्ट ब्लॉक के घरेलू उपचार निम्नलिखित हैं –

हार्ट ब्लॉकेज में अर्जुन वृक्ष की छाल के फायदे (Arjun ki chhal for Heart blockage in Hindi)

अर्जुन वृक्ष का हर भाग औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है। इसे सदाबहार औषधि वृक्ष भी कहा जाता है। हार्ट ब्लॉक से सम्बंधित रोगों जैसे – कोलेस्ट्रॉल, हार्ट अटैक, धमनी (Artery) में ब्लॉक, ब्लड प्रेशर, ह्रदय की धमनी की बीमारी आदि के उपचार में अर्जुन की छाल बहुत ही लाभदायक होती है। इसमें प्राकृतिक आक्सीकारक (Natural Oxidizing agent) पाया जाता है।

यह रक्तवसा (Cholesterol) के लेवल को नियंत्रित रखता है और ह्रदय को स्वस्थ रखने का कार्य करता है। हार्ट ब्लॉक से बचने के लिए आप अर्जुन वृक्ष की छाल का उपयोग किया जाता है।

अर्जुन की छाल के सेवन की विधि

सबसे पहले तो इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि अर्जुन की छाल को कभी भी उबालना (Boil) नहीं चाहिए क्यूंकि इसको उबालने या गर्म करने से इसके गुण कम होते जाते हैं। इसलिए आप अर्जुन की छाल को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट दें और उसके बाद उनको रातभर पानी में भिगोकर रख दें। सुबह उठने के बाद आप पानी में से टुकड़ों को निकालकर उसको पी सकते हैं।

इसके अतिरिक्त आप अर्जुन की छाल के पाउडर को भी इसी प्रकार प्रयोग कर सकते हैं।

लहसुन के सेवन से ठीक करें हार्ट ब्लॉक की समस्या (Garlic for Heart blockage in Hindi)

लहसुन कई सारे रोगों को ठीक करने का कार्य करता है। इसमें एक नहीं बल्कि कई सारे पोषक तत्त्व पाए जाते हैं जैसे – विटामिन बी व सी, मेग्नेशियम, सेलेनियम (Selenium), कार्ब्स (carbs) एवं प्रोटीन आदि पाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त लहसुन में एलिसिन (Allicin) नामक औषधीय तत्व पाया जाता है जिसमे एंटीऑक्सिडेंट, एंटीफंगल और एंटीवायरल गुण पाए जाते हैं।

लहसुन शरीर के रक्त जमने नहीं देता है जिससे नसों में रक्त का थक्का नहीं बनता है और हार्ट अटैक व हार्ट ब्लॉक (heart blockage ka ilaaj) की समस्या नहीं आती है।

लहसुन garlic for heart blockage in hindi
लहसुन

लहसुन का सेवन करने की विधि –

  1. लहसुन की दो या तीन कलियों को बारीक़ टुकड़ों में काटकर एक गिलास दूध में डालकर उबालें उसके बाद उसे छानकर रोज रात को सोने से पहले पियें। इससे हार्ट ब्लॉक की समस्या धीरे-धीरे ठीक होने लगती है।
  2. अपने आहार या भोजन में भी लहसुन को शम्मिलित कर सकते हैं
  3. सुबह के समय में लहसुन की कलियाँ चबा सकते हैं

लौकी के सेवन से हार्ट के ब्लॉक में लाभ मिलेगा (Bottle gourd for Heart blockage in Hindi)

ह्रदय से सम्बंधित बीमारियों को ठीक करने के लिए लौकी भी बहुत लाभदायक होती है। यह कई रोगों को ठीक करने में सहायक होती है। इसका सेवन करने से बाल जल्दी सफ़ेद नहीं होते हैं एवं यह शरीर को भी ठंडा रखने में सहायता करती है। यह रक्तचाप को नियंत्रित रखने में भी सहायक होती है जिससे ह्रदय सम्बंधित रोग नहीं होते हैं।

लौकी के सेवन की विधि –

  • लौकी का सेवन करने के लिए आप इसकी सब्जी का सेवन कर सकते है। सप्ताह में कम से कम तीन से चार बार लौकी का सेवन किसी भी रूप में करने से हार्ट ब्लॉकेज (Heart blockage treatment in Hindi) की समस्या को ठीक करने में सहायता मिलती है।
  • इसके अतिरिक्त आप लौकी का जूस (Loki ka juice) भी पी सकते हैं। जूस में आप तुलसी के पत्ते या पुदीना भी मिला सकते है या सेंधा नमक भी डाल सकते हैं।

हार्ट के ब्लॉकेज के लिए अलसी है अमृत समान (Flax seed for Heart blockage in Hindi)

अलसी ह्रदय सम्बंधित रोगों के लिए अमृत समान कार्य करता है। इसमें पाया जाने वाला फाइबर रक्त के कोलेस्ट्रॉल को ठीक करने का कार्य करता है जो कि हार्ट ब्लॉक की समस्या का कारण बनता है। इसमें अल्फा-लिनोलेनिक अम्ल (Alpha-linolenic एसिड, ALA) अधिक मात्रा में पाया जाता है जो नसों के रक्तवसा (Cholesterol) को कम करने का कार्य करता है तथा रक्त प्रवाह को भी नियंत्रित करता है।

अलसी के सेवन करने की विधि –

  • इसका सेवन करने के लिए आप इसका पाउडर बना सकते हैं और प्रतिदिन सुबह एक गिलास गुनगुने पानी में इसका पाउडर मिलाकर सेवन कर सकते हैं।
  • इसके अतिरिक्त इसका सेवन करने के लिए आप इसका जूस, सूप या सब्जी में भी अलसी का प्रयोग कर सकते हैं।

ह्रदय की रूकावट को ठीक करने के लिए पीपल का सेवन (Peepal leaves for Heart blockage in Hindi)

पीपल में बहुत सारे औषधीय गुण पाए जाते हैं। यह ह्रदय सम्बंधित रोगों को ठीक करने का कार्य करता है। पीपल में एंटी-ऑक्सीडेंट गुण भी पाए जाते हैं जिसके कारण ह्रदय सही तरीके से कार्य करने में सक्षम होता है। पीपल हार्ट ब्लॉकेज के लिए रामबाण (Heart blockage ka ramban ilaj) इलाज है। 

पीपल का सेवन करने की विधि – 

सबसे पहले पीपल के बड़े व परिपक्व गहरे हरे वर्ण के पत्तों को दोनों तरफ से काटकर 14 से 15 पत्तों को एक गिलास में उबालें। जब पानी की मात्रा 1/3 रह जाये तब छान लें। इस काढ़े को प्रत्येक ढाई या तीन घंटे पश्चात् सेवन करें। प्रतिदिन इसका सेवन करने से ह्रदय की रूकावट (heart blockage ka ilaaj) में बहुत अधिक लाभ मिलेगा।

अनार का सेवन हार्ट ब्लॉकेज में (Pomegranate for Heart blockage in Hindi)

हार्ट ब्लॉक को ठीक करने में अनार का भी बहुत बड़ा योगदान रहता है। यह शरीर में रक्त वृद्धि करने के साथ-साथ हार्ट से सम्बंधित रोगों को भी ठीक करने में सहायक होता है। अनार में पादपरसायन यानि फाइटोकैमिकल (Phytochemical) पाया जाता है। यह पादपरसायन एंटी-ऑक्सीडेंट के समान कार्य करता है तथा क्षतिग्रस्त धमनियों को ठीक करता है और क्षतिग्रस्त होने से रोकता है।

अनार का सेवन करने की विधि –

  • प्रतिदिन एक गिलास अनार का जूस पी सकते हैं इससे जल्दी लाभ मिलता है। इसके साथ में खजूर भी खा सकते है।
  • सुबह शाम एक-एक अनार का सेवन कर सकते हैं

दालचीनी से दूर करें दिल के ब्लॉकेज की समस्या (Cinnamon for Heart blockage in Hindi)

दालचीनी cinnamon for heart blockage
दालचीनी

ह्रदय और साँस से सम्बंधित रोगों को ठीक करने के लिए दालचीनी बहुत लाभदायक होती है। यह ख़राब कोलेस्ट्रॉल को साफ करने का कार्य करती है। इसमें भी अर्जुन वृक्ष के समान ऑक्सिडाइजिंग तत्त्व पाए जाते है जो हार्ट ब्लॉकेज और अस्थमा के लक्षणों को ठीक करने का कार्य करता है।

दालचीनी का सेवन कैसे करें –

दालचीनी का सेवन आप शहद के साथ कर सकते हैं। इसके लिए आप दो चम्मच शहद में तीन चम्मच दालचीनी का पाउडर मिलाकर प्रतिदिन दिन में तीन बार सेवन करें। इससे हार्ट ब्लॉकेज के लक्षण ठीक होने लगते हैं।

गोझरण अर्क का सेवन करें हार्ट के ब्लॉकेज में (Divya Godhan Ark for Heart blockage in Hindi)

ह्रदय सम्बंधित रोगों को ठीक करने के लिए गोधन या गोधन अर्क वरदान है। इसके सेवन से बहुत सारी बीमारियां ठीक हो जाती है। यह औषधि हार्ट के ब्लॉकेज (heart blockage ka ilaaj) को ठीक करने के लिए सबसे उत्तम आयुर्वेदिक उपचार है। इसमें एंटीथेरोस्क्लोरोटिक (Antiatherosclerotic) गुण पाए जाते हैं। यह दवाई आयुर्वेदिक दुकान पर सरलता से मिल जाती है।

गोझरण अर्क के सेवन की विधि – 

इसका सेवन करने के लिए किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से अवश्य परामर्श लें।

हल्दी के सेवन से होता है ह्रदय का ब्लॉकेज का उपचार (Turmeric for Heart blockage in Hindi)

हल्दी में सैकड़ों औषधीय गुण उपस्थित रहते हैं जिनका वर्णन आयुर्वेद में भी मिलता है। हल्दी में इम्यूनोमॉड्यूलेटरी एजेंट (immunomodulatory agents) पाए जाते हैं जो श्वेत रक्त कोशिकाओं (White blood cells) के कार्य में सुधार करते हैं। जिसके कारण ह्रदय की नसें ब्लॉक नहीं होती है।

इसके अतिरिक्त हल्दी में करक्यूमिन (curcumin) पाया जाता है जिसमें एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं जो बंद धमनियों को खोलने का कार्य करता है और रक्त को जमने से रोकता है। इस प्रकार या ह्रदय की रूकावट (heart blockage treatment without surgery hindi) को खोलने का कार्य करता है।

हल्दी के सेवन करने की विधि –

प्रतिदिन शाम को सोने से पहले एक गिलास दूध में एक चम्मच हल्दी मिलाकर सेवन कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त अपने आहार या भोजन में भी हल्दी डाल सकते हैं।

अंगूर के सेवन से हार्ट का ब्लॉक ठीक करें (Grapes for Heart blockage in Hindi)

फलों का सेवन करना स्वास्थ के लिए अच्छा रहता है। अंगूर खाने के भी कई सारे फायदे होते हैं। इसमें पोलीफेनोल (Polyphenol) नामक एंटी-ऑक्सीडेंट पाया जाता है जो रक्त वाहिकाओं (Blood vessels) को स्वस्थ रखने का कार्य करता है। साथ ही अंगूर के सेवन से कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी नियंत्रित रहता है जिससे हार्ट ब्लॉकेज या ह्रदय की रूकावट (heart blockage treatment without surgery hindi) नहीं होती है।

हार्ट ब्लॉकेज में लाल मिर्च का प्रयोग (Red chilli for Heart blockage in Hindi)

मिर्ची खाने के भी कई सारे फायदे होते हैं। इसमें स्कोवाइल (scoville) पाया जाता है जो हार्ट सम्बंधित रोगों को ठीक करने में सहायक होता है। इसके आलावा कैप्सैसिन (Capsaicin) पाया जाता है जो रक्त में दूषित रक्तवसा को साफ करने का कार्य करता है। इसके आलावा यह रक्त परिसंचरण में सुधार करता है। इससे दिल की रूकावट को ठीक करने का कार्य करता है।

लाल मिर्च के सेवन की विधि – 

इसका सेवन करने के लिए आप एक गिलास गुनगुने पानी में एक या आधा चम्मच लाल मिर्च पाउडर मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से लाभ मिलता है।

नोटलाल मिर्च का सेवन करने से पहले अपने आयुर्वेदिक चिकित्सक से अवश्य परामर्श लें 

हार्ट ब्लॉकेज से बचाव (Prevention of Heart blockage in Hindi) 

यदि आप दिल की रूकावट से बचना चाहते हैं अर्थात यह बीमारी होने ही नहीं देना चाहते हैं तो सबसे पहले ऐसी वस्तुओं और पदार्थों का सेवन बंद कर दें जिनसे ह्रदय की रूकावट वाली बीमारी होती है जैसे – अधिक तेल वाली चीजों का सेवन न करें और ऐसी वस्तुओं का सेवन अधिक करे जिनसे ह्रदय सुरक्षित रहता है जैसे – अंगूर, अनार, लौकी, लहसुन, हल्दी, नीम्बू, इलायची व अदरक आदि।

इसके अतिरिक्त खानपान व जीवनशैली में भी सुधार करके आप इस रोग से बच सकते है। वायु प्रदुषण से भी बचना चाहिए और नशीले पदार्थों का सेवन भी नहीं करना चाहिए। धूम्रपान से भी दूर रहें।

हार्ट ब्लॉकेज दौरान आहार व जीवनशैली (Diet and Lifestyle during Heart blockage in Hindi)

हार्ट ब्लॉकेज की समस्या होने पर रोगी को बहुत सारी सावधानियां रखनी चाहिए अन्यथा कुछ ऐसी घटना हो सकती है जिससे रोगी को जान से भी हाथ धोना पड़ सकता है। इसके लिए रोगी को विशेष रूप से खानपान व जीवनशैली का ध्यान रखना चाहिए।

ह्रदय की रूकावट में रोगी का आहार या खानपान

दिल की रुकावट में रोगी खानपान निम्न प्रकार से होना चाहिए –

हार्ट ब्लॉक में क्या खाएं 

  1. गेहू, जौ, पुराना चावल जैसे अनाजों का सेवन करें
  2. मसूर, मूंग, सोयाबीन व मटर जैसी दालों का सेवन करना चाहिए
  3. हरी सब्जियों का सेवन करें- कद्दू, लौकी, करेला, नीम्बू, आलू, टमाटर, पालक, गोभी, मिर्च, हरा धनिया, हल्दी, लहसुन, मैथी व तोरई आदि का सेवन लाभदायक होता है।
  4. फलों का सेवन करें- सेब, अनार, अंगूर, संतरा, स्ट्रॉबेर्री, अमरुद, पपीता, नाशपाती, आम व काला अंगूर आदि का सेवन करें।
  5. अदरक, हल्दी, मिर्च पाउडर, जीरा, दालचीनी, लहसुन व दालचीनी जैसे गरम मसालों का सेवन करें।

हार्ट ब्लॉक में क्या न खाएं 

  1. नया चावल व मैदे से बनी वस्तुओं का सेवन न करें
  2. उड़द की दाल का सेवन न करें
  3. बेंगन, अरबी, कटहल, शकरकंद, सिंघाड़ा, चौलाई व बथुआ जैसी सब्जियां न खाएं
  4. दूध का अधिक सेवन न करें
  5. मांस व मछली का सेवन न करें और नशीले पदार्थों व धूम्रपान से दूर रहें
  6. इन सबके अतिरिक्त नमक, तेल व तेलीय पदार्थ, घी, बासी भोजन, ठन्डे पेय पदार्थ, मीठे पदार्थ, बाजार के पैकिंग पदार्थ, अचार, पिज्जा बर्गर जैसे फ़ास्ट फ़ूड व अंडे का सेवन न करें

ह्रदय की रूकावट में रोगी की जीवनशैली

दिल की रुकावट में रोगी की जीवनशैली निम्नलिखित प्रकार की होनी चाहिए –

  1. अधिक परिश्रम न करें व भारी वजन वाली वास्तु को न उठायें
  2. अधिक आराम भी न करें और अपने हाथ-पैरों को हिलाते रहें व मालिश करनी चाहिए
  3. घर के आंगन में शाम सुबह टहलना चाहिए
  4. हार्ट ब्लॉकेज के रोगी को तनाव व अवसाद से दूर रहना चाहिए।

हार्ट ब्लॉकेज से सम्बंधित सवाल-जवाब (Questions & answers [FAQs] related to Heart blockage in Hindi)

ह्रदय या दिल की रुकावट से सम्बंधित प्रश्न व उनके उत्तर निम्नलिखित हैं-

हार्ट ब्लॉक होने पर क्या होता है?

हार्ट ब्लॉकेज होने के बाद यह इतना घातक हो जाता है कि इसकी कल्पना करना कठिन है। जब ह्रदय की धमनियों में ब्लॉकेज हो जाता है तो ये संकरी हो जाती है। जिसके करण इनका कार्य बाधित हो जाता है और दिल का दौरा (Heart attack) भी पड़ सकता है।

क्या हार्ट ब्लॉकेज की समस्या गंभीर होती है?

हार्ट ब्लॉकेज एक ऐसी गंभीर समस्या है जिसका समय पर परिक्षण व उपचार नहीं किया जाता है तो यह घातक या जानलेवा भी बन जाती है। इसके अतिरिक्त समय पर इलाज न किया जाये तो हार्ट अटैक भी आ सकता है। इसलिए हार्ट ब्लॉक की समस्या होने पर देरी नहीं करनी चाहिए।

किन लोगों को हार्ट ब्लॉकेज का खतरा होता है?

हार्ट ब्लॉक अलग-अलग लोगों में अलग-अलग प्रकार का होता है। जिन लोगों की वेगस तंत्रिका (Vagus nerve) अत्यधिक सक्रीय होती है, उनको भी फर्स्ट डिग्री हार्ट ब्लॉकेज की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त जो लोग अधिक तनाव और अवसाद में रहते है और जिन लोगों को पहले से ही ह्रदय से सम्बंधित समस्या है। उनको भी ह्रदय की रूकावट का खतरा हो सकता है।

हार्ट ब्लॉकेज कितने समय तक रहता है?

यह बात रोगी के ऊपर निर्भर करती है कि हार्ट ब्लॉकेज कितने समय तक रहता है। यदि रोगी समय पर दवाओं का सेवन नियमित रूप से सेवन करता है और अपने आहार और जीवनशैली का ठीक प्रकार से पालन करता हो तो कम समय में ही रोगी को हार्ट ब्लॉकेज से छुटकारा मिल सकता है।

हार्ट ब्लॉकेज का पता लगाने के लिए कौनसा टेस्ट किया जाता है?

दिल की रूकावट (Heart blockage ecg) की जाँच करने के लिए एक प्रकार का परिक्षण या टेस्ट किया जाता है जिसे इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम या ईसीजी (Electrocardiogram, ECG) के नाम से जाना जाता है।

आयुर्वेद के अनुसार दिल में ब्लॉकेज होने का क्या करण होता है?

आयुर्वेद के अनुसार मनुष्य में तीन प्रकार के दोष होते है- वात, पित्त और कफ। ये दोष मानव में संतुलित अवस्था में पाए जाते हैं। जब इनमें असंतुलन उत्पन हो जाता है तो शरीर में कई प्रकार की समस्याएं पैदा हो जाती है। आयुर्वेद के अनुसार ह्रदय में ब्लॉकेज की समस्या पित्त और कफ दोषों में असंतुलन के करण होती है।

दिल में ब्लॉकेज होने के कितने स्टेज होते हैं?

ह्रदय में ब्लॉकेज मुख्य रूप से तीन स्टेज या चरणों में होता है। प्रथम चरण में इसका कोई विशेष लक्षण नहीं होता है और ह्रदय की धड़कन सामान्य से थोड़ी कम चलने लग जाती है। प्रथम चरण में रोगी को कोई विशेष खतरा नहीं होता है। द्वितीय चरण में भी ह्रदय की धड़कन सामान्य से धीमी पड़ जाती है। तृतीय स्टेज में रोगी को अधिक खतरा होता है। इसमें रोगी की धड़कन रुक-रुक कर चलने लग जाती है। द्वितीय और तृतीय स्टेज में रोगी को ह्रदय का दौरा या अटैक भी आ सकता है।

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