एलर्जी (Allergy in Hindi) – कारण, बचाव व घरेलू उपाय

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जिस प्रकार से देश और पूरी दुनिया में प्रदुषण बढ़ता जा रहा है, उसी प्रकार से लोगों में एलर्जी या प्रत्यूर्जता (Allergy) की समस्याएं बढ़ती जा रही है। एलर्जी (Allergy) एक प्रकार से त्वचा की प्रतिक्रिया होती है जो विशेष रूप से शरीर द्वारा किसी बाहरी पदार्थ के प्रति होती है।

किसी भी व्यक्ति को एलर्जी तब होती है, जब वह व्यक्ति ऐसी वस्तु को खा लेता है या उस वस्तु के संपर्क में आता है, जिसके बारे में प्रतिरक्षा तंत्र या प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune system) यह विश्वाश कर लेती है कि यह वस्तु शरीर के लिए हानिकारक है।

एलर्जी प्रतिरक्षा प्रणाली का एक अतिसंवेदनशीलता विकार है, जिसके तहत शरीर एलर्जी उत्पन्न करने वाले पदार्थ जिसे ऐलर्जेन (Allergen) कहते हैं, के प्रति अतिप्रतिक्रिया करता है और प्रभावित व्यक्ति के शरीर में एक उत्तेजक प्रतिक्रिया का कारण बनता है। एलर्जी पैदा करने बाहरी पदार्थों में मुख्य रूप से धूल, पराग कण, दवाइयां आदि हैं।

एलर्जी से सम्बंधित प्रतिक्रियाएं भिन्न-भिन्न होती है। छोटी समस्या वाली एलर्जी से लेकर गंभीर व खतरा उत्पन्न करने वाली तीव्रगाहिता सम्बन्धी प्रतिक्रियाएं (anaphylactic reaction) हो सकती है। यह एलर्जी बच्चों में बहुत सामान्य होती है जो उनके बड़े होने के साथ-साथ एलर्जी भी गायब होती जाती है, किन्तु कुछ बच्चों में यह लम्बे समय तक चलती है।

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एलर्जी क्या है? (What is Allergy in Hindi)

Allergy in hindi
एलर्जी
Allergy kya hai  allergy kya chij hai

एलर्जी एक ऐसी स्थिति है जो किसी पदार्थ को खाने या उस पदार्थ के संपर्क में आने पर आपको बीमार अनुभव कराती है। इसमें हमारा प्रतिरक्षा तंत्र शरीर की रक्षा के लिए एंटीबॉडी उत्पन्न करता है। ये एंटीबॉडीज शरीर की ऊर्जा कोशिकाओं को रक्त के अलग-अलग रसायनों को जारी करने के लिए प्रेरित करती है। इन रसायनों में एक है हिस्टामिन (Histamine)

यह हिस्टामिन नाक, गले, आँख, फेफड़ों, त्वचा और पाचन तंत्र पर कार्य करता है तथा एलर्जी (Allergy in Hindi) सम्बन्धी प्रतिक्रियाओं के लक्षण उत्पन्न करता है।

जब एलर्जन अर्थात एलर्जी उत्पन्न करने वाला पदार्थ शरीर में प्रवेश करता है या उसके संपर्क में आता है तो एंटीबॉडी उसकी पहचान कर हिस्टामिन को रक्त में जारी कर देती है जिससे एलर्जी के लक्षण दिखने लगते हैं। यह एलर्जी की समस्या तब होती है, जब आपका प्रतिरक्षा तंत्र यह विश्वास कर लेता है कि आपने जो पदार्थ खाया है या जिस पदार्थ के संपर्क में आये हैं वो शरीर के लिए हानिकारक है। 

एलर्जी के लक्षण (Symptoms of Allergy in Hindi)

symptoms of allergy in hindi
एलर्जी के लक्षण
Allergy ke lakshan in hindi   allergy symptoms in hindi   

यदि एलर्जी (Allergy) उत्पन्न करने वाला पदार्थ साँस के द्वारा शरीर में प्रवेश किया है तो यह मुख्य रूप से नाक, गले, आंख या फेफड़ों को प्रभावित या संक्रमित करता है और यदि एलर्जी पैदा करने वाले पदार्थ को मुख के द्वारा अर्थात खाया या पिया गया हो तो यह पेट, आँतों या मुँह को संक्रमित या प्रभावित करता है।

एलर्जी (Allergy) की समस्या होने के कारण व्यक्ति को रोज के कार्यों में बाधा उत्पन्न होती है। कई बार तो गंभीर एलर्जी प्रतिक्रिया (Allergy reaction in hindi) होती है, जिसे एनाफिलेक्सिस (Anaphylaxis in hindi) कहते हैं। इसके कारण मनुष्य की मृत्यु भी हो सकती है।

अगर लक्षणों की बार्ट करें तो एलर्जी (Allergy ke ayurvedic upchar) के लक्षण हल्के और गंभीर दोनों प्रकार के होते हैं जो निम्नलिखित है –

एलर्जी के हल्के या आम लक्षण 

एलर्जी के हल्के लक्षण निम्नलिखित है –

  • छींक आना
  • त्वचा पर सूजन आना या लाल, रुखी या सूखना
  • शरीर पे खुजली होना
  • कान बंद होना
  • त्वचा पर चकते बनना
  • चेहरे, होंठ, आँखों या जीभ पर सूजन आना
  • उल्टी, मितली या दस्त आना
  • कान, गले या साइनस में खुजली होना
  • नाक बहना या बंद होना
  • आँखों से आंसू आना या खुजली होना
  • मुँह से कफ आना
  • पेट दर्द होना या बुखार अथवा बीमार अनुभव करना

एलर्जी के वे लक्षण जो कम सामान्य होते है 

इसके अंतर्गत उन लक्षणों को रखा है जो सामान्य और गंभीर के बीच में होते है अर्थात न तो सामान्य होते हैं और न ही गंभीर होते हैं, जो निम्न हैं –

  • साँस लेने में समस्या होना
  • बार-बार खुजली चलना
  • सिरदर्द होना या पेटदर्द होना
  • घरघराहट की आवाज आना
  • बार-बार खांसी चलना आदि

इसके अतिरिक्त कुछ परिस्थितियों में एलर्जी के  गंभीर लक्षण भी होते हैं जिसे एनाफिलेक्सिस या  एनाफिलेक्टिक शॉक (Anaphylactic shock) भी कहते हैं। यह बहुत ही खतरनाक और जानलेवा होता है जिसमें समय पर इलाज (Allergy ka ilaj) नहीं होता है तो मृत्यु भी हो सकती है।

एनाफिलेक्सिस के लक्षणों में ऊपर वर्णित लक्षणों में से कोई भी लक्षण हो सकता है। इसके अतिरिक्त अन्य गंभीर लक्षण भी होते हैं –

एलर्जी के गंभीर या एनाफिलेक्सिस (Anaphylaxis symptoms in hindi) लक्षण 

  • साँस लेने में कठिनाई होना
  • मुँह और गले में सूजन आना
  • त्वचा या होंठ नीले पड़ना
  • मूर्छित या बेहोश होना
  • चेतना खोना
  • चक्कर आना या उलझन
  • पुरे शरीर पे खुजली होना और सूजन आना या लाल पड़ना आदि।

एनाफिलेक्सिस (Anaphylaxis ka treatment) के लक्षण बहुत ही आपात स्थिति है जिसे तुरंत इलाज की आवश्यकता होती है। 

एलर्जी के कारण (Causes of Allergy in Hindi) 

शरीर में एलर्जी क्यों होती है?   एलर्जी किस कारण से होती है?  Allergy hone ke karan in hindi

एलर्जी उत्पन्न करने के पीछे हजारों कारण होते हैं अर्थात एलर्जी पैदा करने वाले हजारों एलर्जन होते हैं। प्रत्येक शरीर में एंटीबाडीज पाए जाते हैं जो प्रतिरक्षा तंत्र के घटक अर्थात आम भाषा में कहें तो एक तरह के जासूस होते हैं। ये एंटीबॉडीज (Antibodies) शरीर में घुसने वाले बाहरी पदार्थों से लड़ते हैं।

सभी एलर्जेन या प्रत्यूर्जतोत्पादक पदार्थ शरीर के लिए हानिकारक नहीं होते हैं। हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली हानिकारक और गैर-हानिकारक पदार्थों के बीच भेद नहीं बता पाती है इसलिए यदि आपको एलर्जी है तो प्रतिरक्षा प्रणाली की एंटीबॉडीज उन पदार्थों की पहचान कर लेती है और उसे हानिकारक समझ लेती है भले ही वह हानिकारक न हो।

इस प्रकार यह कह सकते हैं कि सभी एलर्जेन जो एलर्जी का कारण बनते हैं, शरीर के लिए हानिकारक नहीं होते हैं चाहे उनसे शरीर को एलर्जी होती हो।

हालाँकि, प्रतेक व्यक्ति को अलग-अलग पदार्थ से एलर्जी होती है इसलिए ये पता लगाना बहुत कठिन है कि एलर्जी के मुख्य कारण (why allergy occurs in body in hindi) क्या होते हैं, किन्तु अधिकतर लोगों को जिन पदार्थों से एलर्जी होती है वो पदार्थ निम्नलिखित है –

  • वायुजनित एलर्जी जैसे – धूल, धुँआ या परागकण।
  • पशुओं या जानवरों से सम्बंधित एलर्जी जैसे – पशुओं के बाल, उनकी कोशिकाओं से बनाई गई सामग्री और पालतू जानवरों के संपर्क में आने से उत्पन्न एलर्जी।
  • कीड़ों से सम्बंधित एलर्जी जैसे – मधुमक्खियों या ततैया का काटना
  • दवाइयों से सम्बंधित एलर्जी जैसे – कुछ एंटीबायोटिक्स, एस्पिरिन और पेनिसिलिन आदि।
  • खाद्य पदार्थों से सम्बंधित एलर्जी जैसे – दूध या दूध से बने पदार्थ, अंडे, नट्स और मछली आदि।
  • पेड़-पौधों से सम्बंधित एलर्जी जैसे – घास, फूलों के परागकण, पर्वतीय देवदार, रागवीड, रेग्रास और फफूंद आदि
  • कुछ अन्य पदार्थ जैसे – लेटेक्स आदि

एलर्जी के प्रकार (Types of Allergy in Hindi) 

Allergy ke prakar in hindi  allergy kitne prakar ki hoti hai  एलर्जी कितने प्रकार की होती है 

लोगों में होने वाली एलर्जी कई प्रकार की होती है जिनकी व्याख्या करना कठिन है किन्तु एलर्जी के कुछ प्रकार सामान्य होते हैं जो कि निम्नलिखित हैं –

ड्रग एलर्जी (Drug Allergy in Hindi)

ड्रग एलर्जी (Drug Allergy ka ilaj) जैसा कि इसके नाम से पता चल रहा है कि यह दवाओं से होने वाली एलर्जी है। इस प्रकार की एलर्जी में हमारा प्रतिरक्षा तंत्र किसी दवाई या मेडिसिन से प्रभावित होकर प्रतिक्रिया देता है। जिसके कारण एलर्जी (allergic bronchitis in hindi) के लक्षण उत्पन्न होते हैं।

मौसमी एलर्जी (Seasonal Allergy in Hindi)

वह एलर्जी जो किसी खास मौसम में ही उत्पन्न होती है उसे मौसमी एलर्जी (Seasonal Allergy treatment) कहते हैं। इसके अंतर्गत नाक बहना या बंद होना, छींके आना, खांसी या गले में खराश आना, ठण्ड के दिनों में पैरों की अँगुलियों में खुजली और दर्द होना तथा साइनस से सम्बंधित समस्या उत्पन्न होना आदि।

इसे पर्यावरण एलर्जी या एनवायर्नमेंटल एलर्जी (environmental allergy) भी कह सकते हैं।

फ़ूड एलर्जी (Food Allergy in Hindi)

खाद्य पदार्थों से होने वाली एलर्जी को फ़ूड एलर्जी (food allergy treatment) कहते हैं। इसके अंतर्गत वह एलर्जी आती है जो किसी विशेष खाद्य पदार्थ से उत्पन्न होती है जैसे – दूध, अंडे, मांस-मछली आदि। जब किसी व्यक्ति को किसी खाद्य पदार्थ से एलर्जी होती है तो मुँह, कान, गले के अंदर खुजली होने लगती है और त्वचा पर सूजन और लाल चकते बन जाते हैं।

डस्ट एलर्जी (Dust Allergy in Hindi)

धूल से होने वाली एलर्जी को डस्ट एलर्जी कहते हैं। जब कोई व्यक्ति उड़ती हुई धूल से गुजरे और यदि उसे साँस लेने में समस्या, नाक में भारीपन, छींकें आना, नाक बहना या खांसी चलना जैसी समस्याएं होती हो तो उसे डस्ट एलर्जी अर्थात धूल से एलर्जी (Dhool se allergy) है। इसे डस्ट माइट एलर्जी (Dust mite Allergy in Hindi) भी कहते हैं।

लेटेक्स एलर्जी (Latex Allergy in Hindi)

कुछ प्रकार की प्रोटीन से होने वाली एलर्जी जो कि प्राकृतिक रबर लैटेक्स (Latex Allergy treatment in Hindi) में पाई जाती है। लेटेक्स से होने वाली एलर्जी को लेटेक्स एलर्जी कहा जाता है।

कांटेक्ट डर्मेटाइटिस (Contact dermatitis in Hindi)

किसी पदार्थ या वस्तु के संपर्क में आने से होने वाली एलर्जी कांटेक्ट डर्मेटाइटिस कहलाती है। इस प्रकार की एलर्जी में किसी पदार्थ के संपर्क में आने या उसे छूने से त्वचा पर लाल चकते बन जाते हैं और खुजली होने लगती है। इस एलर्जिक कांटेक्ट डर्मेटाइटिस (Allergic contact dermatitis in Hindi) भी कहते हैं।

एटोपिक डर्मेटाइटिस (Atopic dermatitis in Hindi)

एटोपिक डर्मेटाइटिस एक प्रकार का एक्जिमा (Aczema) है जो आपकी त्वचा को लाल बना देती है और उसमें बहुत खुजली होती है। एटोपिक डर्मेटाइटिस लंबे समय तक चलने वाली बीमारी है जो समय-समय पर गंभीर हो जाती है। यह अस्थमा या हे फीवर (Hay Fever) के साथ हो सकता है। यह छोटे बच्चों में आम है लेकिन किसी भी उम्र में हो सकता है।

एनाफिलेक्सिस एलर्जी (Anaphylaxis Allergy in Hindi)

यह एलर्जी बहुत खतरनाक एवं जानलेवा होती है। तीव्रग्राहिता (Anaphylaxis treatment) से रोगी की मृत्यु भी हो सकती है। अनफिलैक्सिस मनुष्यों एवं जानवरों में होने वाली बाह्य प्रोटीन के प्रति बहुत ही खतरनाक एलर्जिक प्रतिक्रिया है।

अर्थात प्रथम बार बाह्य प्रोटीन को शरीर में प्रविष्ट (इंजेक्शन द्वारा) करने के तुरंत बाद या कुछ दिनों के बाद दुबारा उसी बाह्य प्रोटीन को शरीर में प्रविष्ट करते ही तीव्रग्राहिता उत्पन्न होती है।

एलर्जिक अस्थमा (Allergic Asthma in Hindi)

जिस पदार्थ या चीज से एलर्जी की समस्या होती है उसी पदार्थ से अस्थमा शुरू होता है। इस प्रकार के अस्थमा या दमा को एलर्जिक अस्थमा (Allergy Asthma hindi) कहा जाता है।

जानवरों से एलर्जी (Pet Allergy in Hindi)

पशुओं के बाल, त्वचा कोशिकाओं, मूत्र एवं लार से होने वाली एलर्जी को पेट एलर्जी (Janvaron se allergy) कहते हैं। जानवरों से होने वाली एलर्जी के कारण छींके आना, खुजली होना, साँस फूलना, खांसी चलना आदि समस्याएं आती है।

मोल्ड एलर्जी (Mold Allergy in Hindi)

फफूंद से होने वाली एलर्जी (Fafund Allergy in Hindi) को मोल्ड एलर्जी कहते हैं। इस प्रकार की एलर्जी विशेषकर अधिक नमी वाले स्थानों पर होती है। सर्दियों के दिनों में धूल के कण नमी के संपर्क में आने से फफूंद का रूप ले लेते हैं और गर्मियों का मौसम आने पर ड्राई होकर साँस के द्वारा शरीर में प्रवेश करते हैं। इस प्रकार यह एलर्जी गर्मियों में अधिक होती है।

नाक की एलर्जी (Allergic Rhinitis in Hindi)

इस प्रकार की एलर्जी (allergy cough hindi) विशेषतः मौसम बदलते समय होती है। विशेषकर बसंत ऋतू का मौसम आने के दौरान फूलों के परागकणों (Pollen allergy in hindi) को साँस के द्वारा नाक में प्रवेश करने के कारण होती है। जिसके कारण श्वास नली में सूजन आ जाती है। इसके अतिरिक्त छींके आना, नाक बहना और नाक में खुजली होना आदि समस्याएं भी आती है।

एलर्जी से बचाव (Prevention of Allergy in Hindi)

Allergy se kaise bache   allergy se bachav ke upay  एलर्जी से बचने के उपाय

सबसे पहले तो एलर्जी की रोकथाम करने के लिए व्यक्ति को जिन पदार्थों या वस्तुओं से एलर्जी होती हो उनसे दूर रहना चाहिए। इसके अतिरिक्त धूल व परागकणों से बचने के लिए अपने घर की साफ-सफाई करते रहना चाहिए और घर के कपड़ों, तकिये, बिस्तर आदि को साफ रखना चाहिए। अपने घर की खिड़कियों को खुला रखें। घर को हवादार रखना चाहिए।

घर के बाहर जाते समय मुंह पर मास्क अवश्य लगाना चाहिए ताकि सड़क की धूल और वाहनों का धूआ साँस के द्वारा नाक में प्रवेश न कर सके। जब भी आप घर के बाहर खाना खाने जाएँ तो पहले यह अवश्य पता कर लें कि खाने में वो पदार्थ तो नहीं है जिनसे आपको एलर्जी है।

पालतू जानवरों से हमेशा दूरी बनाये रखें। अपने घर और बैडरूम में पालतू जानवरों को न आने दें उनको घर के बाहर रखना चाहिए। प्रतिदिन अपने पालतू जानवरों को नहलाना चाहिए ताकि उनमे किसी भी प्रकार का संक्रमण न हो।

जिन लोगों को फफूंद से एलर्जी की समस्या होती हो उनको नमी वाले वातावरण में नहीं रहना चाहिए। फफूंद या मोल्ड (Mold) में पाए जाने वाले बारीक़ कण एलर्जी का कारण बन सकते हैं इसलिए अपने घर को भी सूखा तथा हवादार रखना चाहिए। घर में किसी भी प्रकार का कपड़ा नहीं सुखाना चाहिए तथा घर नमी मुक्त रहना चाहिए।

जो लोग पूरा दिन घर के बाहर रहते हैं उस दौरान उनके शरीर की त्वचा पर धूल मिट्टी आदि जैम जाती है। ऐसे में घर पर आने के बाद गुनगुने पानी से स्नान करना चाहिए। इससे एलर्जी की आशंका नहीं रहती है। इसके अतिरिक्त ठन्डे मौसम में भी गुनगुने पानी का सेवन करने से सर्दी-जुकाम एवं खांसी की आशंका दूर हो जाती है।

लोग सबसे अधिक डस्ट एलर्जी के शिकार रहते हैं इसलिए घर की सफाई करते समय और वैक्यूम क्लीनर का प्रयोग करते समय हमेशा मास्क पहनें। इसके अतिरिक्त जिन लोगों को डस्ट से एलर्जी है उनको रात को सोते समय गर्म पानी से नहाना चाहिए ताकि त्वचा से धूल के कण निकल जाये।

इसके अतिरिक्त एलर्जी से बचने के लिए निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए –

  • खाने-पीने की वस्तुओं और भोजन को हमेशा ढंककर रखना चाहिए
  • हमेशा हो सके तो घर का ही भोजन खाने का प्रयास करें और हमेशा अच्छे से पका हुआ भोजन करें
  • भोजन पकाने व खाने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि भोजन में कोई एलर्जी वाली चीज तो नहीं है
  • घर में के भीतर कपड़ों को नहीं सुखाना चाहिए क्यूंकि नमी वाले स्थानों से भी एलर्जी की समस्या आ सकती है
  • घर को ऐसा रखें कि उसमें हवा आती-जाती रहे और घर को सूखा रखना चाहिए
  • घर के कपड़े जैसे तकिये, बिस्तर, पर्दे एवं अन्य कपड़ों से बने खिलौनों को धोकर साफ रखना चाहिए
  • पालतू जानवरों से थोड़ी दूरी बनाये रखें और उन्हें घर में नहीं घूसने दें
  • नमी वाले स्थानों, नमी लकड़ी, नमी युक्त इमारतों और अन्य नमी युक्त पदार्थों से दूर रहें
  • घांस वाली जगहों पर जाने से बचें
  • कीटों एवं मधुमक्खियों से बचने के लिए अपने शरीर को ढंककर रखें और जूते पहने व सुगंध वाली चीजों जैसे इत्र का इस्तेमाल न करें क्यूंकि इससे कीट आकर्षित होते हैं।
  • तले हुए पदार्थों और बाहर का खाना जैसे- पिज्जा, बर्गर, नूडल्स आदि का सेवन करना चाहिए।

एलर्जी का परीक्षण (Diagnosis of Allergy in Hindi)

Allergy ka parikshan  एलर्जी का परीक्षण कैसे करें?  allergy ki janch kaise hoti hai

एलर्जी यकायक या आकस्मिक शुरू हो सकती है जिसके कारण शरीर पर चकते बन सकते हैं, खुजली भी चल सकती है और छींके भी आ सकती है। इसलिए आपको एलर्जी है या नहीं इसका पता लगाना बहित कठिन होता है। एलर्जी के लक्षणों पर नजर रखनी पड़ती है जैसे कि एलर्जी के लक्षण किस कारण से या किस पदार्थ या वस्तु से बढ़ती है।

एलर्जी के लक्षणों पर नजर रखकर उसका परीक्षण करना सरल हो जाता है। ताकि चिकित्सक को लक्षणों की सही जानकारी प्रदान कर सकें और वे एलर्जी की जाँच करके उसका पता लगा सके।

नोट : हमारे द्वारा बताये गए परीक्षणों में से कोई भी परीक्षण स्वयं न करें। अन्यथा आपको हानि पहुँच सकती है। 

एलर्जी की जाँच (Tests for Allergy in Hindi) करने के लिए निम्नलिखित प्रकार के टेस्ट किये जा सकते हैं –

एलर्जी के लिए खून की जाँच (Blood test for Allergy in Hindi)

खून की जाँच (khoon ki janch for allergy) के द्वारा एलर्जी का टेस्ट करने के लिए डॉक्टर आपके शरीर से रक्त का सैंपल लेंगे और उसे लैब में भेजेंगे। उसके पश्चात् लेबोरेटरी में रक्त के नमूने या सैंपल में एलर्जेन या एलर्जी पैदा करने वाले पदार्थ को डाला जाता है। रक्त उस एलर्जी कारक या एलर्जेन पर प्रहार करने के लिए कितने एंटीबाडी उत्पन्न करता है उनकी गणना की जाती है।

पैच टेस्ट या पैच परीक्षण (Patch test in Hindi)

पैच एक निदान पद्धति है जिसका प्रयोग एलर्जी के क्षेत्र में किया जाता है। इस परीक्षण में यह देखा जाता है कि कौन सा विशिष्ट पदार्थ या वस्तु किसी रोगी की त्वचा के लिए एलर्जी का कारण बनता है। पैच टेस्ट का मुख्य प्रयोग एक्जिमा के लिए किया जाता है जिसका कारण किसी रसायन या किसी पदार्थ के संपर्क से होता है।

इसमें किसी रसायन या पदार्थ की थोड़ी सी मात्रा को किसी विशेष मेटल या धातु की तस्तरी या प्लेट पर रखकर 24 से 72 घंटों के लिए आपकी त्वचा पर टैप की मदद से बांध दिया जाता है और एलर्जी की प्रतिक्रिया पर नजर रखी जाती है। इसे स्किन पैच टेस्ट (Skin patch test in Hindi) भी कहते हैं।

स्किन प्रिक टेस्ट (Skin prick test in Hindi)

यह एक सबसे आम एलर्जी परीक्षणों में से एक है। इस टेस्ट में शरीर की त्वचा पर एलर्जिक पदार्थ युक्त घोल की कुछ बूंदें डाली जाती है। इस घोल को त्वचा में पहुंचाने के लिए त्वचा पर छोटे-छोटे छिद्र किए जा सकते हैं।

यदि उस एलर्जिक पदार्थ के संपर्क से शरीर में कोई एलर्जिक प्रतिक्रिया जैसे – खुजली, सूजन आदि की समस्या आती है तो इसका मतलब है कि उस पदार्थ से उस व्यक्ति (जिस पर स्किन प्रिक परीक्षण किया गया) को एलर्जी है।

नोट: स्किन एलर्जी टेस्ट में पॉजिटिव रिपोर्ट से एलर्जी की गंभीरता का पता नहीं लगाया जा सकता है। रिपोर्ट सकारात्मक आने पर भी यह स्पष्ट कहा जा सकता है कि उस पदार्थ से रोगी को एलर्जी है।

निगरानी चुनौती परीक्षण (Surveillance Challenge Test in Hindi)

इस प्रकार के टेस्ट में रोगी को वो खाद्य पदार्थ दिया जाता है जिसके बारे में रोगी को लगता है कि उसे उस खाद्य पदार्थ से एलर्जी है। यह खाद्य पदार्थ किसी एक्सपर्ट या चिकित्सक की निगरानी में दिया जाता है। खाद्य पदार्थ धीरे-धीरे बढ़ती हुई मात्रा में दिया जाता है जिससे कि एलर्जिक रिएक्शन का पता लगाया जा सके।

यह परीक्षण बहुत खतरनाक होता है क्योंकि इसमें गंभीर एलर्जिक प्रतिक्रिया हो सकती है। इसलिए यह टेस्ट चिकित्सक या एलर्जी के विशेषज्ञ की उपस्थिति में ही करना चाहिए। निगरानी चुनौती परीक्षण ऐसे स्थान पर करना चाहिए जहां पर गंभीर एलर्जिक रिएक्शन के बाद उसका उपचार हो सके।

अंतर्त्वचीय परीक्षण (Intradermal test in Hindi)

इस टेस्ट में एलर्जिक पदार्थ की थोड़ी सी मात्रा को इंजेक्शन के द्वारा शरीर की त्वचा के अंदर डाला जाता है। उसके बाद एलर्जिक प्रतिक्रिया को देखा जाता है। यदि किसी त्वचा परीक्षण या स्किन टेस्ट में पदार्थ प्रतिक्रिया न कर पाए तो उसके बाद इंट्राडर्मल टेस्ट किया जाता है।

एलर्जी के टेस्ट में सावधानियां (Precautions in allergy test in Hindi)
  1. सभी परीक्षण किसी चिकित्सक या विशेषज्ञ की उपस्थिति में ही किया जाना चाहिए
  2. एलर्जी टेस्ट को अस्पताल या क्लिनिक पर ही करना चाहिए जहां पर तुरंत गंभीर प्रतिक्रिया का इलाज किया जा सके।

एलर्जी के घरेलू उपाय (Home remedies for Allergy in Hindi)

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भारत में लगभग 150 से अधिक खाद्य पदार्थ ऐसे हैं जो एलर्जी का कारण बनते हैं। दुनिया भर में एलर्जी की समस्या बढ़ती जा रही है। इनमें से एलर्जी (Allergy) के कुछ प्रकार तो ऐसे हैं जिनका इलाज (Allergy ka ilaj) संभव नहीं है किंतु घरेलू व आयुर्वेदिक उपायों (Allergy ka ayurvedic ilaj) से एलर्जी को कम किया जा सकता है।

एलर्जी के घरेलू नुस्खे निम्नलिखित हैं-

एलर्जी में नीम के फायदे (Allergy me neem ke fayde)

Neem for Allergy in hindi
Neem leaves

नीम में एंटी-इंफ्लेमेटरी (Anti-inflammatory) एवं एंटी-बैक्टेरियल (Anti-bacterial) गुण अपस्थित रहते हैं। इसमें एंटी-हिस्टामाइन (Anti-histamine) गुण भी पाए जाते हैं जो एलर्जी के लक्षणों को रोकने का कार्य करते हैं। ताजी नीम की पत्तियों को पीसकर उसका रस निकालें और प्रतिदिन सुबह खाली पेट पिएं। इसके अलावा आप नीम की पत्तियों को भी खा सकते हैं।

नीम की कड़वाहट के कारण जिन लोगों को नीम के सेवन करने में परेशानी होती है वो नीम का पेस्ट भी त्वचा पर लगा सकते हैं। इसके लिए नीम के पत्तों को पीसकर उसका अच्छे से पेस्ट बना लें और त्वचा पर लगा लें। उसके बाद लगभग 25 से 30 मिनट बाद उसे साफ पानी से धो लें।

एलर्जी में नमक के पानी के फायदे (Allergy me Namak ke pani ke fayde in Hindi)

अगर आपको नाक या गले से सम्बन्धित कोई एलर्जी (allergy homeopathy hindi) जैसे – एलर्जिक राइनाइटिस या साइनोसाइटिस है तो नमक के गुनगुने पानी से इस ठीक किया जा सकता है। प्रतिदिन सुबह-शाम गुनगुने पानी में नमक डालकर गरारे करें।

एलर्जी में हल्दी के फायदे (Turmeric in Allergy in Hindi)

आयुर्वेद में हल्दी के हजारों उपयोग (Haldi ke upyog) बताए गए हैं। इसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का गुण भी पाया जाता है। हल्दी में एंटी बैक्टिरियल (anti-bacterial), एंटी इन्फ्लेमेटरी (anti-inflammatory) एवं एनाल्जेसिक (analgesic) गुण के साथ-साथ एंटी हिस्टामाइन (anti-histamine) गुण भी पाया जाता है।

जो स्किन एलर्जी, एलर्जिक राइनाइटिस एवं नाक व गले से सम्बन्धित एलर्जी को ठीक करने में सहायता करती है। इसके लिए आप प्रतिदिन शाम को सोने से पहले हल्दी वाला दूध पिएं। इसके अलावा आप किसी भी रूप में हल्दी का सेवन कर सकते हैं जैसे सब्जी में या शहद के साथ आदि।

एलर्जी में शहद के फायदे (Honey for allergy in Hindi)

शहद में एलर्जी से लड़ने के गुण पाए जाते हैं। इसमें एंटी हिस्टामिन गुण भी पाया जाता है जो स्किन एलर्जी या त्वचा एलर्जी (Honey for Skin allergy in hindi) को भी ठीक करता है। प्रतिदिन दिन में चार-पांच बार एक-एक चम्मच शहद खाने से एलर्जी बहुत जल्दी ठीक हो जाती है।

एलर्जी में नींबू के फायदे (Lemon for Allergy in Hindi)

Lemon uses in hindi
Lemon and Ginger

नींबू में विटामिन-सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो प्रतिरक्षा तंत्र (Immuno system) को मजबूत करके इम्युनिटी को बढ़ाता है। इसके आलावा इसमें एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant) व एंटी हिस्टामिन (Antihistamines) गुण भी पाया जाता है जो एलर्जी को दूर रखने में मदद करता है।

प्रतिदिन सुबह उठकर एक नींबू पर नमक और हल्दी लगाकर खाएं। इससे एलर्जी ठीक हो जाएगी और कभी एलर्जी की समस्या भी नहीं आएगी। इसके अतिरिक्त आप नींबू को सलाद या सब्जी में निचोड़कर या नींबू पानी भी बनाकर पी सकते हैं।

एलर्जी में लहसुन के फायदे (Garlic for Allergy in Hindi)

लहसुन में कई प्रकार के रोगो के लिए रामबाण इलाज (Allergy ka ramban ilaj) का कार्य करता है। इसमें हजारों प्रकार के आयुर्वेदिक गुण पाए जाते हैं। लहसुन में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण पाया जाता है जो एलर्जी को ठीक करने में सहायता करता है इसका सेवन प्रतिदिन करने से त्वचा पर बने चकते व सूजन ठीक हो जाती है।

एलर्जी में नारियल तेल के फायदे (Coconut oil for Allergy in Hindi)

त्वचा एलर्जी को दूर करने के लिए नारियल तेल लाभदायक होता है। यह जले हुए शरीर के निशान को भी ठीक करने में मदद करता है। इसमें खुजली और पिम्पल्स को ठीक करने का गुण भी पाया जाता है। इसके आलावा ये सिर में डेंड्रफ या रुसी और बालों को जड़ने से भी रोकता है।

त्वचा की एलर्जी को ठीक करने के लिए प्रतिदिन हल्का गर्म नारियल तेल (tvacha allergy me nariyal tel lagane ke fayde) त्वचा पर लगाएं और पूरी रात लगे रहने दें। इससे त्वचा एलर्जी (Skin Allergy ke upay) ठीक होती है। जिन लोगों के बल झड़ते हैं या बालों में रुसी की समस्या है वो प्रतिदिन नहाने के बाद सिर में नारियल तेल लगाएं। 

एलर्जी में कालीमिर्च के फायदे (Black pepper for Allergy in Hindi)

काली मिर्च में नाक की एलर्जी ठीक करने का गुण पाया जाता है। यदि जुकाम के कारन आपका नाक लगातार बाह रहा है तो आप कालीमिर्च का सेवन कर सकते हैं। इसके लिए आप प्रतिदिन पाउडर में शहद मिलाकर खा सकते हैं। ध्यान रहे कि इसके बाद आधे घंटे तक कुछ भी खाना-पीना नहीं हैं।

काली मिर्च के सेवन से गला व फेफड़े का संक्रमण भी ठीक होता है। इसलिए प्रतिदिन कालीमिर्च का सेवन करना चाहिए।

एलर्जी में पेपरमिंट या पुदीना के फायदे (Peppermint for Allergy in Hindi)

पेपरमिंट में एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी एलर्जिक गुण पाए जाते हैं जो एलर्जी के लक्षणों को ठीक करते हैं। इसमें वाहिकासंकीर्णक (vasoconstrictor) का गुण भी पाया जाता है। यह त्वचा की खुजली मिटाने में सहायता करता है। खुजली वाले स्थान पर पिपरमिंट के तेल को लगाने से खुजली ठीक हो जाती है।

एलर्जी का इलाज (Treatment for Allergy in Hindi)

एलर्जी का उपचार (skin allergy in hindi treatment) के लिए एंटी एलर्जी (Anti-allergy) दवाइयां आती हैं। इन दवाओं (Allergy ki allopathic dava) का सेवन किसी चिकित्सक के परामर्श बिना नहीं करना चाहिए। क्यूंकि दवाई की मात्रा को चुनना तथा किस दवा को किस प्रकार लेना है ये एलर्जी की प्रतिक्रिया गंभीरता पर निर्भर करता है।

एलर्जी का इलाज (allergy ilaj in hindi) करने में चिकित्सक निम्न दवाओं के सेवन का सुझाव दे सकते हैं –

    1. सेटिरीजिन (Cetirizinein Hindi) – यह लम्बे समय तक असर करने वाली एंटी हिस्टामिन दवा है। इसकी मुख्य विशेषता यह है कि यह बिना नींद लाये रोगी की एलर्जी को ठीक कर देती है। यह दवा एक दिन में एक बार ली जाती है।
    2. मोंटेलुकास्ट सोडियम (Montelukast sodium in Hindi) – यह एक ऐसी दवा है जिसका उपयोग (Montelukast sodium ke upyog) दमा (Asthma) के उपचार लिए किया जाता है। इसके आलावा इसका प्रयोग परागज ज्वर (Allergic Rhinitis treatment in allopathy) के इलाज में भी किया जाता है।
    3. बाईलस्टिन (Bilastine) – यह भी एक प्रकार की एंटी हिस्टामिन दवाई है जिसका उपयोग एलर्जी के लक्षणों को ठीक करने के लिए किया जाता है।
    4. डेस्लोरेटाडिन (Desloratadine) – इस दवा का उपयोग विभिन्न एलर्जी लक्षणों जैसे- छींक, बहती नाक व आंसू वाली लाल आँखों एवं विभिन्न त्वचा रोगों के उपचार में किया जाता है।
    5. नाक कॉर्टिकोस्टेरॉइड स्प्रे (nasal corticosteroid spray in hindi) – जिन लोगों की एलर्जी से सम्बंधित समस्या या लक्षण एंटी हिस्टामिन से ठीक नहीं होते है तो उनके लिए नेजल कॉर्टिकोस्टेरॉइड स्प्रे का इस्तेमाल किया जाता है। 

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