एसिडिटी के लक्षण, कारण व घरेलू उपाय Acidity Treatment in Hindi

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एसिडिटी जिसे हिंदी में अम्लता या पेट में गैस बनना भी कहते हैं, धीरे-धीरे लोगों में समस्या बढती जा रही है। आजकल लगभग सभी को एसिडिटी (acidity treatment in hindi) की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। यह बहुत ही आम समस्या है जो पाचनतंत्र से जुडी हुई है। अम्लता की समस्या अनुचित खानपान और ख़राब जीवनशैली के कारण होती है।

यह गलत खानपान जैसे- अत्यधिक मसालेदार चीजें, तीखा भोजन व खाया हुआ भोजन पचने से पहले ही पुनः भोजन कर लेने के कारण पेट में गैस बनने लगती है जिसके कारण एसिडिटी (acidity treatment at home in hindi) की समस्या होने लगती है। यह तब होती है जब लोग नियमित रूप से भोजन नहीं करते है या अधिक भोजन कर लेते हैं जिसमे अधिक तीखा, मसालेदार व तला हुआ भोजन कर लेते है। 

एसिडिटी एक प्रकार से अपच का एक रूप है जिसमें भोजन ठीक तरीके से नहीं से नहीं पच पाता है जिसके कारण पेट में जलन होने लगती है।

जब किसी व्यक्ति को अम्लता की समस्या (acidity ke liye) होती है तो उसे पेट में जलन , पेट में अल्सर, अपच, गेस्ट्राइटिस, कब्ज आदि लक्षण महसूस होते हैं। एसिडिटी का इलाज (acidity treatment in hindi) बहुत ही सरलता से घर पे ही किया जा सकता है। यह बहुत ही सामान्य समस्या होती है।

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एसिडिटी क्या है? (What is Acidity in Hindi)

acidity in hindi
एसिडिटी

जब पेट में जठर ग्रंथि (Gastric gland) अम्ल (मुख्यतः HCl) का निर्माण आवश्यकता से अधिक करने लगती है तो उस स्थिति को एसिडिटी (acidity treatment at home in hindi) कहते हैं। सामान्य रूप से हमारे शरीर के अमाशय (Stomach) में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (Hydrochloric acid) और पेप्सिन का स्त्राव होता है जो भोजन को टुकड़ों में तोड़ने और उसे पचाने का कार्य करता है।

यह अम्ल और पेप्सिन अमाशय में ही रहते हैं और भोजन नली या एसोफैगस के संपर्क में नहीं आते है। भोजन नली और अमाशय के बीच में एक जोड़ होती है जो कुछ विशेष प्रकार की मांसपेशियों से मिलकर बनी होती है। यह जोड़ अपनी सिकुड़न के कारण आहार नलिका और अमाशय का मार्ग बंद रखती है और जब हम कुछ खाते या पीते हैं तो यह मार्ग खुल जाता है।

जब इस जोड़ में कोई समस्या या विकृति उत्पन्न हो जाती है तो यह मार्ग अपने आप खुल जाता जिससे हाइड्रोक्लोरिक एसिड और पेप्सिन ग्रसनी अथवा भोजन नलिका में चला जाता है। ऐसा जब अधिक बार होता है तो भोजन नलिका में सूजन आ जाती है और कई बार घाव भी हो जाता है। जिसके कारण पेट में जलन होने लगती है।

और पढ़ें – पेट दर्द के घरेलू नुस्खे 

किन्तु कभी-कभी पेट की जठर ग्रंथि अधिक हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का निर्माण करती है जिसके कारण पेट में कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न होने लग जाती है जैसे- पेट फूलना, अपच, (hyperacidity symptoms in hindi) पेट में जलन होना आदि। इस रोग को अम्लता या एसिडिटी कहते हैं जो कि आज के युग में बहुत आम समस्या बन चुकी है।

अम्लता को चिकित्सीय भाषा में गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफलक्स डिजीज (gastroesophageal reflux disease, GERD) कहते हैं जिसका मतलब होता है खाने की नली में खाना ऊपर लौटना। एसिडिटी की समस्या गलत तरीके से भोजन करने, धूम्रपान और शराब का सेवन करने अनियमित जीवनशैली और तनाव के कारण होती है।

अधिकतर उन लोगों को अम्लता की समस्या अधिक होती है जो नॉनवेज पदार्थों का सेवन अधिक करते हैं अर्थात जो लोग मांस का सेवन करते हैं उन लोगों को एसिडिटी की समस्या अधिक होती है। इसलिए मांस का सेवन न करने का एक लाभ यह भी मिल सकता है कि इससे एसिडिटी की समस्या (acidity ni dava) होने की आशंका कम हो जाती है।

आयुर्वेद में एसिडिटी (Acidity in Ayurved in Hindi)

आयुर्वेद में एसिडिटी को अम्ल पित्त कहते हैं। आयुर्वेद के अनुसार किसी भी रोग होने का कारण दोषों में असंतुलन होना है। अम्ल पित्त भी दोषों के असंतुलन होने के कारण होता है। जब पित्त दोष बढ़ जाता है तो अम्ल पित्त की समस्या आती है। इस समस्या के कारण खट्टी डकारें और वक्ष (छाती) में जलन होती है।

अम्ल पित्त को आयुर्वेदिक उपचारों (acidity treatment at home in hindi) से ठीक किया जा सकता है। किन्तु सिर्फ आयुर्वेदिक उपायों से इसका उपचार करना कठिन होता है। इसके साथ जीवनशैली और खान-पान में भी सुधार करने की आवश्यकता होती है। इसलिए आयुर्वेदिक चिकित्सक आयुर्वेदिक दवाओं के सेवन के साथ-साथ खान-पान और जीवनशैली में सुधार करने का निर्देश देते हैं।

एसिडिटी के लक्षण (Symptoms of Acidity in Hindi) 

एसिडिटी में रोगी को ऐसा लगता है जैसे किया हुआ भोजन उसके मुँह में आ रहा हो। कभी-कभी तो डकार के साथ में भोजन भी गले में आ जाता है। यह समस्या अधिकतर रात को सोते समय अधिक होती है। अम्लता में व्यक्ति का पीएच मान असंतुलित हो जाता है जिसके कारण यह समस्या देखने को मिलती है। 

एसिडिटी के लक्षण acidity symptoms in hindi
Acidity symptoms

वैसे तो अम्लता का प्रमुख लक्षण पेट में जलन और गैस बनना होता है किन्तु सिर्फ ये लक्षण ही नहीं होते हैं। इनके अतिरिक्त भी एसिडिटी के लक्षण (hyperacidity symptoms in hindi) होते हैं जो निम्नलिखित होते हैं –

  • पेट में जलन और दर्द होना
  • गले और छाती में जलन होना
  • बैचेनी होना
  • हिचकी आना
  • बहुत सी बार एसिड भोजन नलिका से साँस की नलिका में चला जाता है जिसके कारण खांसी चलने लगती है और रोगी को दमा की समस्या होने लगती है।
  • मुंह का स्वाद बिगड़ जाना या खट्टा हो जाना
  • पेट फूलना (hyperacidity symptoms in hindi)
  • खट्टी डकारें आना (कभी-कभी डकार के साथ में भोजन भी गले तक आ जाता है)
  • कब्ज होना 
  • जी मिचलना और मितली
  • चक्कर आना
  • साँस में दुर्गन्ध आना
हाइपर एसिडिटी के लक्षण (hyperacidity symptoms in hindi) 
  • छाती और पेट में बहुत तेज दर्द होना
  • कला या खूनी मल
  • उल्टी के साथ में कभी-कभी खून आना

एसिडिटी के कारण (Causes of Acidity in Hindi)

सामान्य रूप से अमाशय में पाचन क्रिया के लिए पेप्सिन (pepsin) और हाइड्रोक्लोरिक एसिड आवश्यक होते है। ये पदार्थ अमाशय में ही रहते हैं और ग्रासनली या भोजन नलिका में नहीं आते हैं। ये पदार्थ भोजन को टुकड़ों में तोड़ने का कार्य करते हैं और उसे पचाने में सहायता करते हैं।

सामान्यतः अमाशय और भोजन नलिका के मध्य पायी जाने वाली संकुचनशील मांसपेशियां जो अमाशय और भोजन नलिका का मार्ग बंद रखती है। ये मांसपेशियां कुछ भी खाने या पीने पर खुल जाती है और वापस खाली समय में बंद हो जाती है।

जब इस मार्ग में कोई समस्या आ जाती है तो ये अपने आप खुल जाता है जिसके कारण पेप्सिन और हाइड्रोक्लोरिक एसिड भोजन नलिका या ग्रासनली में प्रवेश कर जाते हैं। इस कारण अम्लता या एसिडिटी की समस्या उत्पन्न होती है। जब ऐसा बार-बार होता है तो भोजन नली में सूजन आ जाती है और उसमें घाव हो जाते हैं जो बहुत खतरनाक होते हैं।

Acidity symptoms in hindi
Acidity

एसिडिटी क्यों होती है? एसिडिटी होने का क्या कारण होते है?

अम्लता (Acidity) होने के निम्नलिखित कारण होते हैं –

  • मसालेदार और तले हुए पदार्थों का सेवन अधिक करना
  • भोजन करने के पश्चात् तुरंत सो जाना
  • अधिक शराब पीना और धूम्रपान करना
  • पहले से खाया हुआ भोजन पचे बिना ही तुरंत दुबारा भोजन कर लेना या कुछ खा लेना
  • अधिक नमक का सेवन करना
  • मांस का सेवन करना और तेलयुक्त व मिर्ची युक्त पदार्थों का सेवन अधिक मात्रा में करना
  • स्त्रियों में गर्भावस्था के कारण भी अंदरूनी अंगों पर अधिक दबाव पड़ने से अधिक खाने पर अम्लता या पेट में जलन (acidity ke liye) जैसी समस्या उत्पन्न हो जाती है।
  • शीतल पेय पदार्थों और कार्बोनेट पेय पदार्थों का सेवन करना
  • कैफीन युक्त पदार्थों जैसे- चाय और कॉफी का सेवन अधिक करना 
  • पेट से सम्बंधित यदि कोई रोग है तो उसके कारण भी एसिडिटी की समस्या हो सकती है।
  • लम्बे समय से कोई नॉन स्टेरॉइडल एंटी इंफ्लेमेटरी (NSAI) जैसी कोई पैन किलर का सेवन करना
  • अधिक तनाव रहने के कारण भी भोजन सही प्रकार से नहीं पच पाता है जिसके कारण यह समस्या होती है।
  • फाइबर युक्त पदार्थों का सेवन कम मात्रा में करना
  • व्यायाम न करना और नींद की कमी से भी एसिडिटी (acidity ke liye) की समस्या हो सकती है।
  • कुछ प्रकार की दवाओं जैसे- एंटीबायोटिक्स या NSAI के दुष्प्रभाव के कारण भी अम्लता या पेट में गैस की समस्या हो सकती है।

एसिडिटी (पेट में जलन) से बचने के उपाय (Prevention of Acidity in Hindi)

अम्लता होने का सबसे बड़ा कारण अनियमित और ख़राब जीवनशैली और असंतुलित भोजन होता है। यदि इनमें सुधार किया जाये तो एसिडिटी से बचा (Acidity se bachav) जा सकता है। एसिडिटी से बचने के लिए निम्नलिखित प्रश्न होते हैं-

एसिडिटी होने से कैसे रोकें?

एसिडिटी होने से कैसे बचें?

एसिडिटी से कैसे बचा जा सकता है? 

एसिडिटी से बचने के क्या उपाय है?

अम्लता (acidity ke liye) से बचने के निम्नलिखित उपाय करने चाहिए –

  • अधिक तले हुए व मसालेदार पदार्थों का सेवन न करें
  • भोजन करने के तुरंत बाद नहीं सोना चाहिए
  • धूम्रपान और शराब जैसे मादक पदार्थों का सेवन न करें
  • एक बार भोजन करने के बाद चार घंटों तक कुछ भी न खाएं या दुबारा भोजन न करें
  • मांस-मछली और अधिक मिर्च मसालेदार व तेलयुक्त पदार्थों का सेवन न करें
  • कार्बोनेट पेय जैसे शीतल पेय पदार्थों का सेवन न करें
  • कैफीन युक्त पदार्थों जैसे- कॉफी और चाय का सेवन कम करें
  • फाइबर युक्त पदार्थों एवं हरी सब्जियों का सेवन अधिक मात्रा में करना चाहिए।
  • अच्छी नींद लें और नियमित रूप से व्यायाम करें
  • तनाव से हमेशा दूर रहें
  • रात को सोने से लगभग चार घंटे पहले भोजन करना अर्थात भोजन करने के बाद चार घंटों तक नहीं सोना चाहिए
  • कम-कम मात्रा में अधिक बार पानी पीना चाहिए
  • ऐसे पदार्थों का सेवन न करें या कम करें जिनसे एसिडिटी की समस्या (acidity treatment at home in hindi) बढ़ती हो
  • ऐसी दवाओं का सेवन कम करें जो अम्लता को बढ़ाते हैं
  • अचार व अन्य प्रेजर्वेटिव खाद्य पदार्थ और जंकफूड का सेवन अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए
  • शाम को भोजन करने के पश्चात् एक हजार कदम टहलना चाहिए

एसिडिटी (पेट में जलन) का परिक्षण (Diagnosis of Acidity in Hindi)

कहा जाता है कि यदि किसी बीमारी का परिक्षण करके उसका उपचार किया जाता है तो वो बीमारी जल्दी ठीक होती है। यह बात शत-प्रतिशत सत्य भी है। अम्लता का इलाज (acidity treatment at home in hindi) खानपान और जीवनशैली में सुधार करके और कुछ घरेलू उपायों को अपनाकर किया जा सकता है।

यदि एसिडिटी का इलाज (Acidity ka ilaj) करने के बाद भी सुधार नहीं होता है तो इसके लिए परिक्षण या निदान करने की आवश्यकता होती है। एसिडिटी का निदान करने के लिए चिकित्सक के द्वारा निम्न तरह के टेस्ट किये जा सकते हैं-

  • बेरियम एक्स-रे (Barium x-ray in Hindi) 

इस टेस्ट में रोगी को बेरियम युक्त तरल पदार्थ पिलाया जाता है। उसके बाद शरीर के भीतर से इमेजिंग टेस्ट की सहायता से तस्वीरें खींची जाती है और अम्लता के मुख्य कारण का पता लगाकर उपचार किया जाता है।

  • बेरियम स्वालो (Barium swallow test in Hindi) 

रेडियोग्राफी तकनीक की सहायता से भोजन नलिका और पेट के रोगों का पता लगाने वाले टेस्ट या तकनीक को बेरियम स्वालो कहते हैं। इस टेस्ट की सहायता से भी एसिडिटी का निदान किया जा सकता है।

  • पी एच टेस्ट (pH test in Hindi)

इस टेस्ट की सहायता से पेट और अमाशय की अम्ल की मात्रा की जाँच की जाती है।

  • एंडोस्कोपी टेस्ट (Endoscopy test in Hindi) 

इस टेस्ट को हिंदी में गुहांतदर्शन कहते हैं। इसमें चिकित्सक द्वारा विशेष डिवाइसेस की सहायता से शरीर के अंदरूनी अंगों को देखकर बीमारी का पता लगाया जाता है।

  • बायोप्सी (Biopsy test in Hindi) 

इस टेस्ट के अंतर्गत रोगी के जिस अंग में समस्या है उस अंग के ऊतक का नमूना लेकर लैब में माइक्रोस्कोप की सहायता से जाँच की जाती है। एसिडिटी या अम्लता की जाँच करने के लिए रोगी के पेट के ऊतक (Tissue) का सैंपल लेकर उसकी जाँच की जाती है।

  • एसोफेजियल मैनोमेट्री टेस्ट (Esophageal manometry test in Hindi)

इस टेस्ट की सहायता से यह जाँच की जाती है कि रोगी की अन्नप्रणाली (esophagus) का निचला भाग किस प्रकार कार्य कर रहा है।

  • इम्पीडेन्स मॉनिटरिंग टेस्ट (Impedance Monitoring test in Hindi)

इस प्रकार के टेस्ट में यह देखा जाता है कि एसोफैगस में अम्ल की गति दर कितनी है।

  • सोनोग्राफी या अल्ट्रासोनोग्राफी (Sonography in Hindi) 

एसिडिटी का परिक्षण करने के लिए सोनोग्राफी भी करा सकते हैं।

नोट: उपर्युक्त टेस्ट कराने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य परामर्श लें।

एसिडिटी (पेट में जलन) के घरेलू उपाय (Home remedies for Acidity in Hindi)

एसिडिटी के घरेलू उपाय home remedies for acidity in hindi
Acidity treatment
एसिडिटी के आयुर्वेदिक उपचार

अम्लता से छुटकारा पाने के लिए ढेर सारे घरेलू नुस्खे (acidity treatment at home in hindi) उपलब्ध हैं। इन घरेलू उपायों को अपनाकर घर पर ही एसिडिटी को ठीक किया जा सकता है। आयुर्वेद में भी अम्लता के बहुत सारे उपचार बताएं हैं। एसिडिटी के इलाज (acidity treatment in hindi) के लिए आप निम्नलिखित घरेलू नुस्खे अपना सकते हैं –

एसिडिटी में सौंफ के फायदे (Fennel seeds for Acidity in Hindi)

एसिडिटी का इलाज (acidity treatment at home in hindi) करने में सौंफ (acidity me saunf khane ke fayde) बहुत लाभदायक होता है। यह पेट की जलन को ठीक करता है और दस्त में भी आराम मिलता है। इसके लिए पूरी रात भर एक गिलास शुद्ध जल में सौंफ भिगोकर रखें और सुबह उठकर उस पानी को पी जाएँ। इसके अतिरिक्त आप भूने हुए या कच्चे सौंफ के दाने भी खा सकते हैं।

भोजन करने के बाद सौंफ खाने से भी अम्लता की समस्या नहीं होती है।

एसिडिटी में गुड़ के फायदे (Jaggery for Acidity in Hindi)

गुड़ (acidity me gud khane ke fayde) पेट की समस्याओं के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। इसका सेवन करने से पेट की समस्याएं तो ठीक होती ही है साथ में खून की कमी को भी दूर करता है। इसके लिए आप प्रतिदिन भोजन करने के बाद गुड़ के साथ में काला नमक और सेंधा नमक मिलाकर खा सकते हैं। इससे अम्लता दूर होती है और पेट में गैस की समस्या भी ठीक हो जाती है।

एसिडिटी में ठन्डे दूध के फायदे (Cold milk for Acidity in Hindi)

ठंडा दूध पीने के भी कई सारे लाभ (acidity me thanda doodh ke fayde) होते हैं जिनमें से एक एसिडिटी का इलाज भी है। दूध में कैल्शियम अच्छी मात्रा में पाया जाता है जो की पीएच संतुलन को बनाये रखने में सहायता करता है। इसलिए ठन्डे दूध का सेवन करने से पेट की जलन और एसिड रिफ्लक्स या एसिडिटी की समस्या दूर होती है।

ध्यान रहे कि एसिडिटी में ठंडा दूध ही हो और उसमें शक्कर या कोई अन्य पदार्थ न मिलाएं।

एसिडिटी में खीरा ककड़ी के फायदे (Cucumber for Acidity in Hindi)

खीरा ककड़ी का प्रभाव (acidity me khira kakdi ke fayde) ठंडा होता है। यह पेट की जलन को ठीक कर ठंडा रखता है। इसलिए एसिडिटी की समस्या होने पर खीरा ककड़ी को घरेलू उपचार (acidity treatment at home in hindi) के रूप में इस्तेमाल कर सकते है।

एसिडिटी में जौ के फायदे (Barley for Acidity in Hindi)

अम्लता की समस्या होने पर जौ भी काम आ सकता है। जौ (acidity me jau ke fayde) में एंटी एसिडिक गुण पाए जाते हैं जो पेट में जलन को ठीक करते हैं और साथ में गैस एवं पेट फूलने की समस्या भी से छुटकारा दिलाते हैं। इसके लिए एक चम्मच जौ को एक गिलास पानी में उबालकर उसमें थोड़ा सा निम्बू का रस और नमक मिलाएं। इसका सेवन करने से अम्लता में तुरंत आराम मिलता है।

एसिडिटी में केला के फायदे (Banana for Acidity in Hindi)

केला भी कई सारी पेट की समस्याओं को ठीक करने के काम में आता है। इसमें पाया जाने वाला पेसटिन एसिडिटी, कब्ज और पेट में जलन जैसी समस्याओं को ठीक करने का कार्य करता है। केला (acidity me kela khane ke fayde) का सेवन मुँह और पेट दोनों के लिए फायदेमंद होता है। यह पेट के अल्सर को भी ठीक करने में सहायता करता है। 

एसिडिटी में जीरा के फायदे (Cumin for Acidity in Hindi)

जीरा में उपस्थित मिनरल्स और फाइबर एसिडिटी को ठीक करने के साथ-साथ पाचन तंत्र को भी सुधारने का कार्य करता है। इसके लिए एक चम्मच जीरे (acidity me jeera ke fayde) और एक चम्मच अजवाइन को भूनकर एक गिलास पानी में उबालें और चीनी मिलाकर ठंडा होने के बाद पीलें। इससे अम्लता के साथ में अपच, गैस जैसी समस्याएं भी ठीक हो जाती है।

एसिडिटी में अदरक के फायदे (Ginger for Acidity in Hindi)

अदरक में बहुत सारे गुण पाए जाते हैं जैसे – एंटीबैक्टीरियल व एंटीवायरल आदि। आयुर्वेद में भी अदरक (acidity me adrak ke fayde) के बहुत सारे लाभ बताये गए हैं। यह एसिडिटी के लिए उत्तरदायी जीवाणुओं को मारने का कार्य करता है। इसके लिए आप प्रतिदिन अदरक वाली चाय पी सकते हैं या मसाले के रूप में सब्जी में भी डालकर खा सकते हैं।

इसका सेवन करने से बहुत सारी पेट की समस्याएं ठीक हो जाती है जैसे- अपच, पेट में जलन, पेट में गैस बनना आदि।

एसिडिटी में एलोवेरा के फायदे (Aloe vera for Acidity in Hindi)

पेट से सम्बंधित समस्याओं में एलोवेरा भी बहुत लाभकारी होता है। इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण पाया जाता है। आयुर्वेद में भी एलोवेरा के बारे में बहुत वर्णन किया गया है। एलोवेरा (acidity me aloe vera ke fayde) में ऐन्थ्राक्विनोन (Anthraquinone) नामक पदार्थ पाया जाता है जो अम्लता को काम करता है और पाचन तंत्र को भी शक्तिशाली बनाता है।

इसके लिए आप प्रतिदिन सुबह खाली पेट एलोवेरा का रस पी सकते हैं।

एसिडिटी में दालचीनी के फायदे (Cinnamon for Acidity in Hindi)

यदि पेट में एसिडिटी या पेट में जलन या पेट से सम्बंधित अन्य समस्या है तो आप दालचीनी का भी सेवन कर सकते हैं। ध्यान रहे कि प्रारम्भ में दालचीनी का प्रयोग कम मात्रा में ही करें। इसके नियमित रूप से सेवन करने से पाचनतंत्र भी मजबूत होता है। इसके लिए आप एक गिलास पानी में आधी चम्मच दालचीनी डालकर उबालें उसके बाद थोड़ा सा गुड़ मिलाकर सेवन करें।

एसिडिटी में नारियल पानी के फायदे (Coconut water for Acidity in Hindi)

नारियल पानी में एंटी ऑक्सीडेंट व फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो पाचन शक्ति को बढ़ाने में सहायता करता है और अम्लता को भी कम करने का कार्य करता है। नारियल पानी (acidity me nariyal pani ke fayde) पीने के तुरंत पश्चात ही एसिडिटी में लाभ देखने को मिल सकता है इसलिए इसका सेवन करने से भी अम्लता में लाभ मिलता है।

एसिडिटी में आंवला के फायदे (Amla for Acidity in Hindi)

अमला में पाचन तंत्र को ठीक करने व भोजन को पचाने का गुण पाया जाता है। यह अम्लता और पेट सम्बंधित अन्य समस्याओं को भी ठीक करता है। इसके लिए आप प्रतिदिन आंवले (acidity me amla ke fayde) का पाउडर पानी में मिलाकर पी सकते हैं या आंवले के पाउडर में चीनी भी मिलाकर खा सकते हैं।

इसके अतिरिक्त आंवले का जूस पीने से भी पेट की गैस, अपच, पेट में जलन आदि से भी आराम मिलता है।

एसिडिटी में गुलकंद खाने के फायदे (Gulkand for Acidity in Hindi)

अम्लता और पाचनतंत्र सम्बंधित अन्य समस्याओं को ठीक करने के लिए गुलकंद बहुत लाभदायक होता है। साथ ही यह आंत बैक्टीरिया या गट बैक्टीरिया को बढ़ाने व आंत की कार्य प्रणाली को ठीक करने में भी सहायता करता है। इसके लिए आप गुलकंद (acidity me gulkand khane ke fayde) का सेवन आप सीधे दूध के साथ भी कर सकते हैं। 

एसिडिटी में तरबूज के फायदे (Watermelon for Acidity in Hindi)

तरबूज में भी केले का जैसे फाइबर अधिक मात्रा में पाया जाता है। जिसके कारण पाचन क्रिया अच्छी रहती है। तरबूज (acidity me tarbuj khane ke fayde) का सेवन करने से पेट में गैस की समस्या भी नहीं होती है। इसलिए तरबूज का सेवन करना लाभदायक होता है और एसिडिटी की समस्या वालों को तो तरबूज का सेवन अवश्य करना चाहिए।

एसिडिटी में नीम्बू के फायदे (Lemon for Acidity in Hindi)

नीम्बू का रस अम्लता के लिए बहुत लाभदायक होता है। नीम्बू (acidity me nimbu ke fayde) में विटामिन सी व एस्कॉर्बिक एसिड पाया जाता है जिसका सेवन करने से प्रतिरक्षा क्षमता या इम्युनिटी बढ़ती है। साथ ही यह एसिडिटी व अन्य पाचनतंत्र से सम्बंधित समस्याओं को ठीक करता है।

जब भी अम्लता की समस्या हो या पेट में गैस बने तो तुरंत एक गिलास शुद्ध जल में एक नीम्बू निचोड़कर थोड़ा सा नमक डालकर पी जाएँ। ध्यान रहें कि जिनको हाई बीपी की समस्या है वो इस उपाय का प्रयोग न करें अन्यथा बीपी अधिक बढ़ सकती है।

एसिडिटी में सोंठ और जायफल के फायदे (dry ginger and nutmeg for Acidity in Hindi)

एसिडिटी में सोंठ और जायफल का चूरन भी लाभदायक होता है। जब भी अम्लता की समस्या हो तो इन दोनों के चूर्ण को मिक्स करके आधा चम्मच सेवन करने से एसिडिटी की समस्या ठीक हो जाती है।

एसिडिटी (पेट में जलन) का इलाज (Treatment of Acidity in Hindi)

अम्लता या पेट में जलन का एलोपैथिक इलाज करने के लिए डॉक्टर निम्नलिखित अंग्रेजी या एलोपैथिक दवाओं का उपयोग कर सकते हैं-

एंटी एसिड या एंटासिड (Antacid in Hindi)

इन दवाओं का प्रयोग पेट के एसिड द्वारा होने वाली समस्याओं को ठीक करने के लिए किया जाता है। ये अपच, एसिडिटी (Acidity ka ilaj) व छाती में जलन को ठीक करके राहत प्रदान करती हैं। ये हर मेडिकल व केमिस्ट के दुकान पर सरलता से मिल जाती है। ये इंजेक्शन और टेबलेट फॉर्म में उपलब्ध रहती है।

इनके अतिरिक्त अन्य दवाएं भी आती है जिनसे एसिडिटी को ठीक किया जा सकता है। इन दवाओं में पोर्किनेटिक एजेंट्स (Prokinetic agents), म्यूकोसल सुरक्षात्मक एजेंट (Mucosal protective agents) व एसिड को कम करने वाली दवाएं हैं।

एसिड को कम करने वाली दवाओं में मुख्यतः प्रोटॉन पंप इन्हीबिटर (proton-pump inhibitor) और हिस्टामाइन-2 रिसेप्टर विरोधी (histamine-2 receptor antagonist) सम्मिलित है।

एसिडिटी से जुड़े प्रश्न व उत्तर (Questions and answers [FAQs] related to Acidity in Hindi)

अम्लता या पेट में जलन से जुड़े सवाल व उनके जवाब निम्नलिखित है –

एसिडिटी क्यों होती है?

जब भी हम भोजन करते हैं तो वो भोजन नली से होकर अमाशय में पहुँचता है। अमाशय में उस भोजन को पचाने के लिए एसिड बनता है। यह एसिड भोजन को टुकड़ों में तोड़ने का कार्य करता है जिससे भोजन को पचने में आसानी होती है। जब पेट में यह एसिड आवश्यकता से अधिक बनता है तो एसिडिटी की समस्या उत्पन्न होती है।

एसिडिटी का इलाज कैसे किया जाता है?

अम्लता या एसिडिटी का उपचार घरेलू उपायों या आयुर्वेदिक उपायों की सहायता से बड़ी ही सरलता से किया जा सकता है। ऊपर बहुत सारे घरेलू उपाय बताये गए हैं जिनसे घर बैठे ही एसिडिटी का उपचार किया जा सकता है।

एसिडिटी में क्या खाना चाहिए व क्या नहीं खाना चाहिए?

एसिडिटी में निम्न पदार्थों का सेवन करना चाहिए –

लोकी, कद्दू, खीरा, ब्रोकली, तरोई, सेब, नासपाती, केला, अखरोठ, पपीता, करेला, मौसमी फल व सब्जियों का सेवन करना एसिडिटी में लाभदायक होता है। इसके अतिरिक्त जड़ वाली सब्जियों जैसे- अरबी, गाजर, शकरकंद का सेवन कर सकते हैं। समुद्री नमक व सूखे मेवे का सेवन करना भी एसिडिटी में लाभदायक रहता है।

एसिडिटी में क्या नहीं खाना चाहिए वो है-

अम्लता की समस्या होने पर अधिक वसा युक्त व डेयरी उत्पादों, अधिक मसालेदार, तले हुए पदार्थों एवं कैफीन युक्त पेय जैसे- चाय और कॉफी का सेवन नहीं करना चाहिए। इसमें प्याज, लहसुन व अदरक का सेवन न करें। इसके अतिरिक्त अम्लता में सोडा नहीं पीना चाहिए व चॉकलेट, अनाज व अधिक एसिड वाले पदार्थों का भी सेवन नहीं करना चाहिए।

एसिडिटी में क्या पीना चाहिए व क्या नहीं पीना चाहिए?

एसिडिटी की समस्या होने पर दही, छाछ व ताजे मीठे फलों का रस पी सकते है। इसके अतिरिक्त कैफीन युक्त पदार्थों जैसे कि कॉफी एवं चाय का सेवन नहीं करना चाहिए। शराब, कोल्ड ड्रिंक व टमाटर का रस भी एसिडिटी में नहीं पीना चाहिए।

एसिडिटी उपचार के दौरान क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं?

अम्लता के इलाज के लिए उपयोग की जाने वाली दवाएं जैसे- हिस्टामिन 2 ब्लॉकर्स, एंटासिड्स आदि होती है जिनसे एसिडिटी ठीक की जा सकती है। किन्तु इन दवाओं के दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त एसिडिटी के भी कई सारे नुकसान होते हैं। एसिडिटी लम्बे समय तक रहने पर पेट में सूजन व छाले हो सकते हैं और इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम, मालबसोर्पशन सिंड्रोम जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

क्या एसिडिटी अपने आप ठीक हो सकती है?

सामान्य एसिडिटी कुछ गलत पदार्थों का सेवन करने से होती है। ऐसे में कई बार एसिडिटी की समस्या अपने आप ही ठीक हो जाती है। किन्तु जिन लोगों को बार-बार एसिडिटी की समस्या होती है उनको हाइपर एसिडिटी की समस्या हो जाती है जिसका उपचार करना ही पड़ता है।

एसिडिटी एवं गैस में क्या अंतर है?

गैस और एसिडिटी दोनों ही पेट से जुडी पाचन सम्बन्धी समस्याएं हैं इस कारन कुछ लोग इनको एक ही समझ लेते हैं किन्तु दोनों ही एक-दूसरे से अलग-अलग समस्याएं हैं। पेट में गैस बनना बहुत ही सामान्य समस्या है। जब शरीर में गैस बनती है तो यह मुंह से डकार द्वारा या मलाशय से निकलती है।

जबकि एसिडिटी की समस्या पेट में अतिरिक्त एसिड उत्पादन के कारण होती है। जब अतिरिक्त एसिड भोजन नलिका में प्रवेश कर जाता है तो एसिडिटी की समस्या होती है।

एसिडिटी में क्या-क्या सावधानियां रखनी चाहिए?

एसिडिटी या अम्लता की समस्या होने पर भोजन करने के तुरंत बाद सोना नहीं चाहिए और पानी अधिक पीना चाहिए। एक बार भोजन करने के बाद तीन से चार घंटे तक कुछ नहीं खाना चाहिए। इनके अतिरिक्त धूम्रपान व शराब का सेवन न करें। अधिक तले हुए पदार्थों व मिर्च-मसालेदार पदार्थों का सेवन भी नहीं करना चाहिए।

एसिडिटी का निदान कैसे किया जाता है?

एसिडिटी का निदान करने के लिए कई प्रकार के टेस्ट किये जा सकते हैं। इन टेस्टों में मुख्यतः बेरियम एक्स रे, बेरियम स्वालो, एंडोस्कोपी टेस्ट, पी एच टेस्ट, सोनोग्राफी, बायोप्सी, एसोफेजियल मैनोमेट्री टेस्ट आदि हैं।

एसिडिटी के नुकसान या जटिलताएं क्या है?

एसिडिटी से सम्बंधित कई सारे नुकसान व जटिलताएं देखने को मिलती है। अम्लता की जटिलताओं में मुख्यतः पेट में छाले पड़ना और सूजन आना है। इसके अतिरिक्त एसिडिटी के कारण इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम, मालबसोर्पशन सिंड्रोम व पेट सम्बंधित अन्य रोग देखने को मिल सकते हैं।

एसिडिटी को जड़ से कैसे ख़त्म करें?

यदि किसी व्यक्ति को एक बार एसिडिटी की समस्या हो जाती है तो इसका उपचार तो सरलता से किया जा सकता है किन्तु इसे जड़ से समाप्त करना बहुत कठिन होता है। एसिडिटी को जड़ से समाप्त करने के लिए सबसे पहले इसके बचावों को ध्यान में रखना होगा और उसके बाद एसिडिटी के आयुर्वेदिक उपचारों या घरेलू उपचारों की सहायता से इसे ठीक किया जा सकता है।

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